
'Aliens का हमला या कोई अनहोनी...', आसमान में दिखे रहस्यमयी बादल, घबराए लोग
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सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में बादलों के बीच कई जगह बड़े -बड़े छेद दिखाई पड़ रहे हैं. इसे पोस्ट करते हुए शख्स ने इनके कैप्शन में लिखा है- हम ऑफ की वेस्ट में फिशिंग कर रहे हैं. क्या किसी ने कभी ऐसा बादल देखे हैं? अब इस पर नासा ने जवाब देते हुए एक पोसेट शेयर किया है.
दुनिया में कई बार ऐसी प्राकृतिक घटनाएं होती हैं जो हैरान कर देती हैं.कई बार ये कुछ ऐसा होता है जो आने वाली आपदा जैसी बातें मन में लाकर डरा देता है. हाल में फ्लेरिडा में कुछ ऐसा ही हुआ. टिकटॉक पर एक मछुआरे ने आसमान का ऐसा वीडियो शेयर किया जो समझ से परे लगता है. इसमें बादलों के बीच कई जगह बड़े बड़े छेद दिखाई पड़ रहे हैं. इसके कैप्शन में उसने लिखा है- हम ऑफ की वेस्ट में फिशिंग कर रहे हैं. क्या किसी ने कभी ऐसा बादल देखे हैं?
वीडियो को टिकटॉक पर @blacktiph से शेयर किया गया और इसे 60 लाख लोगों ने देखा. इसपर लोगों ने ढेरों कमेंट भी किए. एक यूजर ने लिखा- ये बादल तो यूएफओ की शेप में हैं. क्या चल रहा है? क्या है ये?
'Aliens का हमला या कोई अनहोनी'
एक यूजर ने लिखा- 'मैंने एलियन अटैक की काफी फिल्में देख ली हैं ताकि मैं जान सकूं कि ये क्या है. दूसरे ने कहा- जिंदगी के 50 सालों में कभी ऐसा कुछ नहीं देखा है. एक अन्य यूजर ने लिखा- 'यह एक सामान्य घटना है जिसे 'वोहतिज़त' कहा जाता है, यह तब होता है जब बादल समुद्र के बीच में इकट्ठा होते हैं और फिर इसे देखने वाले लोग पूछते हैं कि यह क्या है.' एक ने लिखा -'Aliens का हमला होने वाला है या कोई अनहोनी होने वाली है. ये बादल ऐसे क्यों हैं'.
स्पेस एजेंसी नासा ने बताया क्या है माजरा शख्स ने जनवरी में ये वीडियो शेयर किया था और अब जाकर स्पेस एजेंसी नासा ने इसपर जवाब दिया है. नासा ने अपने टेरा उपग्रह से अजीब दिखने वाले बादलों की तस्वीर ली और बताया- इन्हें कैवम बादल, या 'होल-पंच क्लाउड' कहा जाता है. नासा ने कहा - रिसचर्स 1940 के दशक से ही इस घटना पर गहन शोध कर रहे हैं, लेकिन 15 साल पहले ही उन्हें इसका कारण पता चला गया था.
नासा अर्थ ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया, 'अब यह अच्छी तरह से समझ में आ गया है कि ये अजीब बादल निर्माण हवाई जहाजों के कारण होते हैं. कैवम बादल तब बनते हैं जब विमान अल्टोक्यूम्यलस बादलों के किनारों से होकर उड़ते हैं, मध्य स्तर के बादल जिनमें सुपरकूल (पानी के हिमांक बिंदु से नीचे लेकिन अभी भी तरल) पानी की बूंदें होती हैं. जैसे ही हवा विमान के चारों ओर घूमती है, एडियाबेटिक विस्तार नामक एक प्रक्रिया हो सकती है जिससे बूंदें बर्फ के क्रिस्टल में जम जाती हैं! बर्फ के क्रिस्टल अंततः भारी हो जाते हैं और आकाश से गिर जाते हैं, जिससे बादल की परत में एक छेद हो जाता है.'

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