
Adani Stock: दो साल जोरदार रफ्तार, लेकिन 2023 में कैसे फीकी पड़ी अडानी के शेयरों की चमक?
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हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ने अडानी ग्रुप के शेयरों को बुरी तरह से झकझोर कर रखा दिया था. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अडानी ग्रुप की कंपनियों के स्टॉक्स में भारी गिरवाट आई थी, जिसकी वजह से समूह का मार्केट कैपिटलाइजेशन कम हुआ था.
पिछले दो वित्तीय वर्षों में अडानी ग्रुप के शेयरों (Adani Group) ने जोरदार छलांग लगाई थी. लेकिन वित्त वर्ष 2022-23 की आखिरी तिमाही में अडानी ग्रुप के शेयर ऐसे टूटे कि समूह का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Mcap) करीब आधा हो गया. 24 जनवरी को आई हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडानी ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयर भर-भराकर टूटे. हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में अडानी समूह पर स्टॉक में हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए थे. जिसे समूह ने खारिज कर दिया था.
शेयरों में कितनी गिरावट?
वित्त वर्ष 2022-23 में अडानी समूह के शेयरों में 40 फीसदी की गिरावट आई है. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ने समूह को जोरदार झटका दिया. अंतिम काउंट में अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी ग्रीन एनर्जी, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (Adani Ports), अडानी पावर, अडानी टोटल गैस और अडानी ट्रांसमिशन का ज्वॉइंट मार्केट कैपिटलाइजेशन (M-Cap) 29 मार्च 2023 को 7,55,670 करोड़ रुपये था. ये आंकड़ा 31 मार्च 2022 तक के 12,53,068 करोड़ रुपये से 40 फीसदी से कम था.
पिछले दो साल में आई थी जोरदार तेजी
आंकड़ों से पता चलता है कि इन छह कंपनियों का Mcap वित्त वर्ष 22 में 88 प्रतिशत और पिछले वित्त वर्ष में 409 प्रतिशत तक बढ़ा था. 31 मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 तक अडानी के इन छह शेयरों में 855 फीसदी की जबरदस्त तेजी आई थी. स्टडी के लिए हाल ही में अधिग्रहीत एसीसी, अंबुजा सीमेंट्स और एनडीटीवी को लिस्ट से बाहर रखा गया था. अडानी विल्मर को भी इस कैलुकेलशन से बाहर रख गया है. क्योंकि इसकी लिस्टिंग 8 फरवरी 2022 को हुई थी.
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