
A Tale of Two murder cases: आरुषि केस की तरह ही निठारी किलिंग्स के सारे राज राज ही रह गए, सबूत जुटाने में फेल रही सीबीआई, पंढेर-कोली के बरी होने की पूरी कहानी
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आरुषि केस की तरह ही निठारी केस में भी CBI के पास कहानियां तो बहुत सारी थी, मगर सबूत के नाम पर हाथ खाली. क्या CBI ने शुरुआत से ही निठारी केस को हल्के में लिया था? महीनों तक निठारी में जो सबूत बटोरे गए थे, क्या वो सिर्फ तमाशा था? और सबसे बड़ा सवाल ये कि अगर कोली और पंधेर निठारी के गुनहगार नहीं हैं, तो फिर वो कौन हैं?
पूरे देश को दहला देने वाले निठारी कांड के दोनों आरोपियों को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरी कर दिया. इस फैसले के बाद सारे पीड़ित परिवार हैरान हैं. हाई कोर्ट ने आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि सीबीआई इस मामले की जांच के दौरान अहम सबूत जुटाने में नाकाम रही. अब एक बार फिर ये मामला ऐसे मोड पर पहुंच गया है कि जो सवाल निठारी कांड का खुलासा होने पर पुलिस के सामने था, एक बार फिर वही सवाल आज भी सामने है. ये मामला भी आरुषि तलवार केस की तरह ही निकला, क्योंकि निठारी के सारे राज भी राज ही रह गए.
7 सितंबर 2014, रात के करीब 9.30 बजे आज से ठीक 9 साल, 1 महीना और 9 दिन पहले वो रविवार की रात थी. जगह थी मेरठ सेंट्रल जेल. सारी तैयारी पूरी हो चुकी थी. सुरेंद्र कोली को डासना जेल से निकाल कर मेरठ सेंट्रल जेल पहुंचाया जा चुका था. जल्लाद तक आ चुका था. बस, सुबह होने का इंतजार था. सुबह होते ही सुरेंद्र कोली फांसी पर लटकने जा रहा था. रविवार की देर रात कोली की फांसी की खबर अचानक मीडिया में सुर्खियां बन गईं. ये खबर जानी-मानी वकील इंदिरा जयसिंह तक भी पहुंची. मगर चूंकि रविवार था, लिहाजा कोर्ट बंद थी. इंदिरा जयसिंह रात को ही सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से मिलने का वक्त मांगती हैं. इसके बाद रात करीब पौने ग्यारह बजे सुप्रीम कोर्ट के एक सीनियर जस्टिस के घर पर स्पेशल अदालत बैठती है. और फिर सुबह साढ़े चार बजे मेरठ सेंट्रल जेल को ख़बर दी जाती है कि कोली की फांसी रोक दी जाए.
16 अक्टूबर 2023, इलाहाबाद हाई कोर्ट नौ साल एक महीना और आठ दिन पहले जो सुरेंद्र कोली फांसी के तख्ते से महज कुछ घंटे दूर था, वही सुरेंद्र कोली निठारी कांड की हर फांसी की सजा से 16 अक्टूबर को आजाद हो गया. अब जरा सोचिए, अगर सात सितंबर 2014 यानी आज से नौ साल, एक महीना और नौ दिन पहले रविवार की उस रात कोली को फांसी पर लटका दिया जाता तो? अब इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले से कम से कम इस वक्त ये साफ हो गया कि कोली के खिलाफ निठारी कांड से जुड़े एक भी इल्जाम सीबीआई अदालत में साबित नहीं कर पाई. तो क्या नौ साल एक महीना और नौ दिन पहले एक बेकसूर को फांसी पर चढाया जा रहा था?
कुछ यूं सामने आया निठारी कांड का सच ये सवाल खास तौर पर सीबीआई और कानून के जानकार पंडितों से है. क्या निठारी कांड में सीबीआई की जांच इतनी कमजोर थी? या फिर अदालत को ही वो सबूत नजर नहीं आए. ये चुभता हुआ सवाल इसलिए जरूरी है क्योंकि जिस निठारी कांड ने 19 साल पहले पूरे देश को खौला दिया था, जिस निठारी कांड की डेढ़ साल तक सीबीआई ने अंधाधुंध तफ्तीश की थी, आज 19 साल बाद उस निठारी का सच कुछ यूं सामने आया है कि 19 केस में से 1 को छोड दें, तो बाकी सभी 18 केसों में सुरेंद्र कोली और उसका मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर अदालत से बरी हो कर साफ बच गया. शायद ये देश का इकलौता ऐसा मामला है, जिसमें किसी मुजरिम को 19 में से 14 केस में फांसी की सजा सुनाई गई. और वो 14 के 14 फांसी की सजा से साफ बच निकला.
क्या अब आजाद हो जाएंगे सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर! दरअसल, 16 अक्टूबर सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में निठारी कांड पर एक अहम फैसला आना था. ये फैसला सीबीआई की निचली अदालत के उस फैसले पर आना था, जिसमें निठारी के 12 अलग-अलग मामलों में सुरेंद्र कोली को 12 फांसी की सजा सुनाई गई थी. जबकि मोनिंदर सिंह पंधेर को दो मामलों में फांसी दी गई थी. कोली और पंधेर दोनों ने ही गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट के इस फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. एक महीना पहले सितंबर में इस पर कोर्ट में बहस पूरी हो चुकी थी. कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. 16 अक्टूबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसी मामले में अपना फैसला सुनाया. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को 12 के 12 मामलों में जबकि मोनिंदर सिंह पंधेर को दोनों मामलों में मिली फांसी की सजा को रद्द करते हुए दोनों को सीधे बरी कर दिया. अब ऐसे में सवाल ये है कि क्या सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर अब आजाद हो जाएंगे? दोनों जेल से बाहर आ जाएंगे? तो इसे समझने के लिए निठारी कांड के सारे केस को समझना जरूरी है.
29 दिसंबर 2006 ये वही तारीख थी, जिस दिन इराक में सद्दाम हुसैन को फांसी दी गई थी. दुनिया समेत हमारे देश की तमाम मीडिया में भी सद्दाम की फांसी सुर्खियों में थी. इसी खबर के बीच अचानक दिल्ली से मुश्किल से 25 किलोमीटर की दूरी पर नोएडा में बसे निठारी गांव से एक दहलानेवाली खबर आती है. खबर ये कि निठारी में एक नाले से दर्जनों पॉलीथिन में छोटे-छोटे बच्चों के कंकाल मिले हैं. निठारी की जिस डी-5 कोठी के पीछे वाले नाले से ये कंकाल मिले थे, उस कोठी का मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर था. जबकि सुरेंद्र कोली उसी कोठी में रसोइया था. 29 दिसंबर की शाम को ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया.

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