
9 देश, 12000 न्यूक्लियर बम, सिर्फ 500 से खत्म हो सकती है दुनिया... जानिए कैसे शुरू हुई तबाही की ये होड़
AajTak
Nuclear Arms Race: दुनिया को बार-बार एक ही डर से डराया जाता रहा है कि यदि न्यूक्लियर जंग छिड़ गई तो ये दुनिया खत्म हो जाएगी. सवाल ये उठता है कि क्या वाकई इंसानों ने इतने न्यूक्लियर बम बना लिए हैं कि इस पूरी धरती को तबाह किया जा सके? क्या 7 अरब इंसानों को एक साथ मार डालने की ताकत इंसान के पास है?
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस वक्त पूरी दुनिया में 193 देश हैं. लेकिन 12 ऐसे भी देश हैं जो संयुक्त राष्ट्र के सदस्य नहीं हैं. यानी कुल मिलाकर दुनिया में 205 देश मौजूद हैं. इन 205 देशों में लगभग 7 अरब लोग रहते हैं. पूरी दुनिया 51 करोड़ वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैली है, लेकिन इसमें से 71 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 36 करोड़ वर्ग किलोमीटर एरिया पानी से ढका है. ज़मीन केवल 15 करोड़ वर्ग किलोमीटर है, जिस पर ये सारे देश बसे हुए हैं.
दुनिया को बार-बार एक ही डर से डराया जाता रहा है कि यदि न्यूक्लियर जंग छिड़ गई तो ये दुनिया खत्म हो जाएगी. सवाल ये उठता है कि क्या वाकई इंसानों ने इतने न्यूक्लियर बम बना लिए हैं कि इस पूरी धरती को तबाह किया जा सके? क्या 7 अरब इंसानों को एक साथ मार डालने की ताकत इंसान के पास है? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि फिलहाल दुनिया में कितने परमाणु या उससे भी खतरनाक हाइड्रोजन बम हैं और कौन सा देश सबसे खतरनाक बम का मालिक है, जिसे 'डेड हैंड' या 'डूम्स डे डिवाइस' भी कहा जाता है. साथ ही ये जानना भी जरूरी है कि आखिर न्यूक्लियर बम की ये होड़ शुरू कहां से हुई थी?
न्यूक्लियर बम बनाने की बुनियाद दूसरी विश्व युद्ध के दौरान पड़ी, जब लगभग पूरी दुनिया युद्ध के मैदान में तब्दील हो चुकी थी. उस समय ज्यादातर देशों के पास लगभग एक जैसे हथियार थे, लेकिन हर देश इस सोच में लगा था कि ऐसा कोई हथियार उनके हाथ लग जाए जो बाकी किसी के पास न हो. कई देश इस होड़ में लगे हुए थे, लेकिन पहली कामयाबी अमेरिका को मिली. 1945 में अमेरिका ने दुनिया का सबसे विनाशकारी बम बना लिया. इसके कुछ ही हफ्तों बाद अमेरिका ने इस बम का असर देखने के लिए जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर इसे गिरा दिया. नतीजा इतना भयानक था कि इन दोनों शहरों में आज भी उसका असर देखा जा सकता है.
अमेरिका के हाथ जब ये खतरनाक हथियार लगा, तो बाकी दुनिया में भी इसे हासिल करने की होड़ शुरू हो गई. न्यूक्लियर बम बनाने के चार साल बाद, 1949 में सोवियत संघ (अब रूस) दूसरा ऐसा देश बना जिसने परमाणु बम बना लिया. फिर 1952 में ब्रिटेन भी इस कतार में शामिल हुआ और न्यूक्लियर टेस्ट कर न्यूक्लियर पावर कंट्री बन गया. आठ साल बाद, 1960 में फ्रांस ने भी परमाणु परीक्षण कर दुनिया का चौथा परमाणु शक्ति संपन्न देश बनने का दावा किया. ऐसा कहा जाता है कि फ्रांस को इस मामले में अमेरिका से कुछ मदद भी मिली थी.
चीन पर भी दबाव बढ़ता गया और चार साल बाद यानी 1964 में चीन ने भी सफल परमाणु परीक्षण किया और पांचवां न्यूक्लियर पावर देश बना. इजरायल ने कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया कि उसके पास परमाणु बम हैं, लेकिन माना जाता है कि 1967 तक पश्चिमी देशों की मदद से इजरायल ने भी परमाणु बम बना लिया था. हालांकि, इसकी पुष्टि पहली बार 1986 में हुई और तब दुनिया ने उसे छठे न्यूक्लियर पावर देश के रूप में स्वीकार किया.

देश की सर्वोच्च अदालत ने UGC के नए नियमों से सामान्य वर्ग को नफरती करके फंसाए जाने की आशंका को गंभीरता से लिया है. कॉलेज कैंपस में भेदभाव रोकने के नाम पर 13 जनवरी के नियमों को सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है. इसके बाद सामान्य वर्ग की राजनीतिक ताकत और इस मुद्दे के व्यापक मायनों पर चर्चा तेज हो गई है. जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए इन नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक ने इसके भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

प्रयागराज माघ मेले से लौटे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने सरकार को गोहत्या और मांस निर्यात के मुद्दे पर कड़ी चेतावनी दी है. शंकराचार्य ने साफ कहा है कि अगर सरकार द्वारा निर्धारित शर्तें पूरी नहीं की गईं, तो वे मुख्यमंत्री को नकली हिंदू घोषित करेंगे. यह बयान राजनीतिक और सामाजिक विवादों को जन्म दे सकता है क्योंकि गोहत्या और मांस निर्यात जैसे मुद्दे प्रदेश के भीतर संवेदनशील विषय हैं.

झारखंड फेडरेशन ऑफ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FJCCI) के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने राज्य के चार ऐसे जिलों की रेल कनेक्टिविटी समेत अन्य आवश्यक मांगों को लेकर यूनियन बजट में शामिल करने की बात कही है जहां आज तक रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं है. आदित्य मल्होत्रा ने इन जिलों के लिए रेल परिवहन के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह कदम कैसे क्षेत्रीय विकास में सहायक होगा.

उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बदलने वाला है. मौसम विभाग (IMD) के अनुसार आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में फिर बर्फबारी की संभावना है. वहीं, दिल्ली-NCR में 31 जनवरी से 2 फरवरी तक बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है. मौसम विभाग ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के लिए भी बारिश का अलर्ट जारी किया है.

जम्मू कश्मीर से हिमाचल प्रदेश तक पहाड़ों पर लगातार भारी बर्फबारी जारी है. इस बर्फबारी के कारण खूबसूरत नजारे देखने को मिल रहे हैं, जिससे बड़ी तादाद में पर्यटक इन इलाकों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. मौसम के इस बदलाव ने कई रास्ते बंद कर दिए हैं जिससे कई जगहों पर यातायात जाम की स्थिति बनी है. श्रीनगर समेत पुलवामा, कुलगाम, शोपिया, गुरेज और अन्य क्षेत्रों में तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है.

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. अमेरिका ने USS Abraham Lincoln कैरियर ग्रुप अरब सागर में तैनात कर ईरान पर हमले की धमकी दी है. ईरान डर से अपने न्यूक्लियर साइट्सको गहराई में छिपा रहा है. टनल सील कर रहा है. ड्रोन कैरियर शहीद बघेरी को बंदर अब्बास से 6 किमी दूर रखा है. IRGC 1-2 फरवरी को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लाइव-फायर एक्सरसाइज करेगा.

दिल्ली पुलिस की महिला कमांडो काजल की हत्या के मामले अब नई परतें खुल रही हैं. उसके परिजनों ने पति अंकुर पर हत्या के साथ-साथ पेपर लीक रैकेट का मास्टरमाइंड होने के गंभीर आरोप लगाए हैं. दावा है कि काजल के पास उसके काले कारनामों के राज़ थे. हत्या से पहले वीडियो कॉल और डंबल से हत्या के आरोपों ने मामले को और सनसनीखेज बना दिया है.






