
800 में एक किलो आटा, 25 रुपये में रोटी... पाकिस्तान में फिर कैसे बिगड़ने लगे हालात?
AajTak
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अब भी बुरे दौर से गुजर रही है. वहां खाने-पीने की चीजों से लेकर बिजली-पानी जैसी बुनियादी जरूरतों की कीमतें आसमान छू रहीं हैं. एक किलो आटा 800 पाकिस्तानी रुपये में मिल रहा है. ऐसे में जानते हैं कि वहां हालात कैसे हैं? और इसकी वजह क्या है?
एक बार फिर से पाकिस्तान की आर्थिक सेहत बिगड़ने लगी है. वहां खाने-पीने की चीजों की कीमतें आसमान छू रहीं हैं. आलम ये है कि आटा और रोटी जैसी चीजों की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि आम लोगों के लिए इसे खरीद पाना मुश्किल होता जा रहा है.
कराची में एक छोटी सी दुकान चलाने वाले अब्दुल हामीद ने न्यूज एजेंसी को बताया कि खाने-पीने के सामान की कीमत लगातार बढ़ रही है और सरकार आम जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है.
अब्दुल हामीद ने बताया, 'लोग बड़ी मुश्किल से गुजर-बसर कर रहे हैं और सरकार को इसकी चिंता ही नहीं है. हम अपने परिवार के लिए बुनियादी सुविधाएं भी नहीं जुटा पा रहे हैं और हमारे नेता मजे कर रहे हैं. बिजली, पानी और गैस जैसी बुनियादी जरूरतें महंगी हो गईं हैं. हमने गलत लोगों को वोट दे दिया. वो लोग हमारी जरूरतों पर ध्यान दिए बगैर मजे कर रहे हैं.'
लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान के सारे संसाधन अमीर को और अमीर बनाने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं, जबकि आम जनता हर दिन संघर्ष कर रही है.
पाकिस्तान में कैसे हैं हालात?
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, कराची में एक किलो आटा 800 रुपये पाकिस्तानी रुपये का मिल रहा है. जबकि, पहले 230 रुपये था. इतना ही नहीं, एक रोटी की कीमत 25 रुपये पहुंच गई है.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









