
8 प्वाइंट्स में समझें क्या है इद्दत? जिसे लेकर विवादों में आया इमरान खान और बुशरा बीबी का निकाह
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इस्लाम में शरियत के मुताबिक, किसी मुस्लिम महिला के शौहर का इंतेक़ाल यानी मृत्यु के बाद कुछ वक्त के लिए दूसरी शादी करने पर पाबंदी होती है, यही इद्दत है. इद्दत के वक्त यानी एक तय समय के लिए महिला दूसरी शादी नहीं कर सकती. इस तय किए गए वक्त को ही इद्दत कहा जाता है.
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और बुशरा बीबी का निकाह अचानक चर्चा का मुद्दा बन गया है. इसकी वजह है इद्दत का वक्त पूरा न होना. इमरान खान और बुशरा बीबी के निकाह करवाने वाले काज़ी मौलवी मुफ्ती सईद का कहना है कि ये शादी इस्लामिक शरिया कानून के मुताबिक नहीं हुई थी.
मौलवी मुफ्ती सईद का कहना है कि 2018 में ये निकाह बुशरा बीबी की इद्दत के दौरान हुआ था, जो जायज़ नहीं है. इस बात को समझने के लिए पहले ये जानना होगा कि इस्लाम के मुताबिक इद्दत क्या है और क्यों इमरान खान और बुशरा बीबी के निकाह को गैर-इस्लामिक बताया जा रहा है?
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में डिपार्टमेंट ऑफ इस्लामिक स्टडी के प्रोफेसर, जुनैद हारिस ने इस मामले पर खास बातचीत में विस्तार से बताया कि इद्दत क्या है?
क्या है इद्दत? इस्लाम में शरियत के मुताबिक, किसी मुस्लिम महिला के शौहर का इंतेक़ाल यानी मृत्यु के बाद कुछ वक्त के लिए दूसरी शादी करने पर पाबंदी होती है, यही इद्दत है. इद्दत के वक्त यानी एक तय समय के लिए महिला दूसरी शादी नहीं कर सकती. इस तय किए गए वक्त को ही इद्दत का वक्त कहा जाता है. ये वक्त 4 महीने 10 दिन का होता है. इस दौरान महिला पर गैर मर्दों से पर्दा भी जरूरी होता है.
प्रोफेसर जुनैद हारिस के मुताबिक, लोगों में एक आम धारणा में तलाक के बाद कुछ वक्त तक शादी पर रोक को भी इद्दत का वक्त कहा जाता है. हालांकि, इसके लिए सही लफ्ज़ क़ुरू, यानी क़ुरू का वक्त है.
इद्दत क्यों जरूरी? इद्दत का वक्त इस संदेश को मिटाने के लिए तय किया गया है कि महिला प्रेग्नेंट तो नहीं है. क्योंकि इद्दत का वक्त पूरा न हो और फिर प्रेग्नेंसी का पता चले तो उस बच्चे पर सवाल उठ सकते हैं. बच्चे पर सवाल न उठें, इसलिए भी इद्दत का वक्त तय किया गया है. अगर महिला प्रेग्नेंट है तो वो बच्चे के जन्म तक दूसरी शादी नहीं कर सकती.

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