
'50 खोखे, एकदम ओके' पर अठावले ने किया पलटवार, बोले- चलते रहो इक्के
AajTak
महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन के बाद भी सियासत उफान पर है. शिवसेना के उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के बीच बयानों के तीर चल रहे हैं तो वहीं विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान भी तल्खी साफ नजर आई. इन सबके बीच केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया है.
महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन के बाद भी सियासी संग्राम जारी है. शिवसेना बागी गुट के साथ सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और विपक्षी शिवसेना के बीच वार-पलटवार जारी है. महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्षी दल सत्ता पक्ष पर तंज कसने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने दे रहे तो वहीं सत्ताधारी खेमा भी चुन-चुन कर एक-एक वार पर पलटवार कर रहा है.
विपक्षी शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के विधायक विधानसभा में भिड़ गए. इस दौरान 50 खोखे एकदम ओके का नारा भी सुनाई दिया. इसे लेकर अब रामदास अठावले ने पलटवार किया है. गुरुवार को महाराष्ट्र के पुणे पहुंचे रामदास अठावले ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला.
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने विरोधी दलों पर शायराना अंदाज में पलटवार किया. अठावले ने विरोधियों पर पलटवार करते हुए कहा कि 50 खोखे एकदम ओके, खेलते रहो बस तुम इक्के, हम सब हैं बहुत पक्के. इस दौरान रामदास अठावले से गुजरात दंगों से जुड़े बिलकिस बानो गैंगरेप और मर्डर केस के आरोपियों की रिहाई को लेकर भी सवाल पूछे गए.
हर मसले पर अपनी बेबाक राय रखने वाले रामदास अठावले इस सवाल पर कन्नी काटते नजर आए. रामदास अठावले ने बिलकिस बानो केस के आरोपियों की रिहाई से जुड़े सवाल पर कहा कि इसे लेकर मुझे कोई भी जानकारी नहीं है. केंद्रीय मंत्री अठावले ने बिलकिस बानो गैंगरेप केस में सजायाफ्ता दोषियों को रिहा किए जाने से जुड़े सवाल पर कहा कि सामाजिक न्याय मंत्री होने के बावजूद उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है.
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख और उद्धव ठाकरे के चचेरे भाई राज ठाकरे की ओर से उन्हें लेकर की गई टिप्पणी पर उन्होंने इसे लेकर किसी तरह की जानकारी से इनकार किया. गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के विधायकों ने बगावत कर दी थी जिसके बाद उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. कुछ दिन तक चले सियासी ड्रामे के बाद बीजेपी ने शिवसेना के बागियों के साथ मिलकर सरकार बना ली और शिवसेना बागी गुट के नेता एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने. पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








