
4 महीने की प्लानिंग, 2 मास्टरमाइंड और 1 गैंग... पुलिस ने 100 घंटे में ऐसे किया सबसे बड़ी डकैती का खुलासा
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हाल के दौर में इसे सबसे बड़ी डकैती कहा जा रहा है. जिसमें हर वो एलिमेंट है, जो किसी क्राइम थिलर मूवी में होता है. मसलन जिंदगी के किसी मोड़ पर डकैतों का एक दूसरे से मिलना. मिलकर गैंग बनाना और फिर कई महीने की प्लानिंग के बाद वारदात को अंजाम देना.
फिल्मी अंदाज में एक डकैती की वारदात को अंजाम दिया गया. एक सीसीटीवी कैमरे में आधी रात को कैद हुई डकैतों की धुंधली सी तस्वीर. डकैती के पैसों वो लोग ऐश कर रहे थे. इसी दौरान सोशल मीडिया पर उन्होंने एक रील भी शेयर की. जिसे देखकर पुलिस एक्शन में आई और एक नाले से नोटों की गड्डियां बरामद की. इसके बाद खुलासा हुआ कि उस डाकू हसीना का, जिसने इस वारदात को अंजाम दिया. लुधियाना पुलिस ने फिल्मी अंदाजा में ही उस हसीना को खुल्ला चैलेंज किया. इसके बाद पुलिस ने जो किया, वो किसी रोमांच से कम नहीं था.
चलिए आपको इस पूरी कहानी से वाकिफ कराते हैं. हाल के दौर में इसे सबसे बड़ी डकैती कहा जा रहा है. जिसमें हर वो एलिमेंट है, जो किसी क्राइम थिलर मूवी में होता है. मसलन जिंदगी के किसी मोड़ पर डकैतों का एक दूसरे से मिलना. मिलकर गैंग बनाना और फिर कई महीने की प्लानिंग के बाद रात के अंधेरे में अपने ठिकाने पर घात लगाना. वारदात को अंजाम देने के बाद ऊपरवाले के दरबार में हाजिरी लगाना. अपने गुनाहों की तौबा करना, लेकिन आखिरकार बचने की लाख कोशिशों के बावजूद उनका 100 घंटों के अंदर पकड़े जाना. लुधियाना में कैश ट्रांसपोर्ट करनेवाली कंपनी सीएमएस के दफ्तर में हुए 8 करोड़ 49 लाख रुपये की ये डकैती की कहानी तमाम हैरानकुन किस्सों से भरी हुई है.
10 जून 2023, रात 12 बजकर 10 मिनट वो शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात थी. इस वारदात की शुरुआत उसी रात लुधियाना के राजगुरु नगर में मौजूद सीएमएस के दफ्तर से होती है. जहां आधी रात को डकैतों का एक गैंग धावा बोलकर दोनों हाथों से करोड़ों के नोट बटोर कर फरार हो जाता है. लेकिन जाते-जाते अपने पीछे छोड़ जाता है, सीसीटीवी की कुछ धुंधली तस्वीरें, जिनके सहारे पुलिस के सामने गुनहगारों तक पहुंचने की महा-चुनौती थी.
डकैतों को पकड़ने की चुनौती वैसे तो ये वारदात आधी रात को होती है, लेकिन घबराए मुलाजिमों को पुलिस को इतिला देने के लिए हिम्मत जुटाने में भी 5 से 6 घंटे लग जाते हैं. सुबह जब 7 बजे पुलिस को पहली बार इस वारदात की खबर मिलती है, तो उनके भी हाथ-पांव फूल जाते हैं. वजह ये कि ये वारदात एक कैश ट्रांसपोर्ट करनेवाली कंपनी में हुई थी और ऐसी किसी जगह पर डकैती का मतलब ही करोड़ों रुपये की लूट था. ऐसे में पुलिस के लिए इस मामले को सुलझाना जितनी बड़ी चुनौती थी, डकैतों को गिरफ्तार कर सारा का सारा कैश रिकवर करना भी उसी चुनौती का हिस्सा था.
मौका-ए-वारदात पर मिली बड़ी लापरवाही चूंकि मामला बेहद बड़ा था, खबर मिलते ही खुद लुधियाना के पुलिस कमिश्नर मंदीप सिंह सिद्धू मौका-ए-वारदात पर पहुंचे और उन्होंने पूरे क्राइम सीन का जायजा लिया. लेकिन हर रोज करोड़ों रुपये का कैश इधर-उधर करनेवाली सीएमएस कंपनी के इस दफ्तर में उन्हें सुरक्षा के लिहाज से जो लापरवाही नजर आई, उससे खुद कमिश्नर साहब भी हैरान रह गए.
शातिराना अंदाज में डकैती शुरुआती छानबीन के दौरान पुलिस को ये पता चल गया कि तकरीबन 10 से 12 डकैतों का गैंग दो हिस्सों में बंट कर इस दफ्तर पर धावा बोलने पहुंचा था. कुछ लोग दफ्तर के पिछले हिस्से की दीवार फांद कर अंदर दाखिल हुए, जबकि कुछ सामने से आए. खास बात ये थी कि डकैती के लिए आने के दौरान बदमाशों ने पूरे दफ्तर में लगे तमाम सेंसर्स डिएक्टिवेट किए. सीसीटीवी कैमरों के तार काट डाले और जाते-जाते अपने साथ दफ्तर में लगे कैमरों का डीवीआर भी उठा ले गए. और तो और लूटपाट के बाद डकैत जिस कैश वैन के साथ भागे, उसके भी फ्लिकर्स ऑन थे और ऐसा तभी मुमकिन था, जब इस काम में कोई इनसाइडर हो यानी कोई ऐसा शख्स शामिल हो, जिसे सीएमएस की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी हो.

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