
2024 की डगर, भविष्य पर नजर... Rahul Gandhi की Bharat Jodo Nyay Yatra के पीछे क्या है Congress की रणनीति?
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राहुल गांधी मणिपुर से मुबई तक 67 दिन की भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर निकले हैं. लोकसभा चुनाव में जब कुछ ही महीने का समय बचा है, इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर बैठकों का दौर चल रहा है, राहुल गांधी की इस यात्रा के पीछे कांग्रेस की रणनीति क्या है?
देश में लोकसभा चुनाव होने हैं. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को हराने के लिए 28 विपक्षी पार्टियां इंडिया गठबंधन के बैनर तले एक मंच पर आई हैं. चुनाव करीब आते जा रहे हैं, बीजेपी ने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. लेकिन कांग्रेस और इंडिया गठबंधन में अभी सीट शेयरिंग का पेच भी नहीं सुलझा है.
सीट शेयरिंग का पेच पंजाब से दिल्ली और यूपी से बिहार तक सीट शेयरिंग का गणित कैसे सुलझाया जाए, इसे लेकर बैठकों का दौर चल रहा है और इन सारी कवायदों के बीच कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं में से एक राहुल गांधी मणिपुर से मुंबई तक 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' पर निकल गए हैं.
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राहुल गांधी ने इससे पहले दक्षिण भारत के कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा की थी. भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा में अंतर इतना है कि तब राहुल ने ज्यादातर पदयात्रा की थी जबकि इस बार की यात्रा के लिए हाइब्रिड मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा है.इस बार पद यात्रा का हिस्सा छोटा है और एक बड़ा हिस्सा विशेष बस और वाहनो के जरिए होनी है. राहुल गांधी ने इस यात्रा की शुरुआत के मौके पर आयोजित जनसभा में खुद इसके पीछे की वजह भी बताई. उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर से पश्चिम की यात्रा भी पैदल ही करना चाहता था. लेकिन लोकसभा चुनाव के चलते समय का अभाव होने की वजह से यह संभव नहीं हुआ.
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अब राहुल गांधी की इस यात्रा को लेकर सवाल उठने लगे हैं और उन सवालों की जड़ में भी यही दो शब्द हैं- लोकसभा चुनाव और समय का अभाव. सवाल 2024 चुनाव को लेकर कांग्रेस की गंभीरता पर भी उठ रहे हैं और राहुल गांधी की यात्रा पर भी. सवाल सीट शेयरिंग पर अब तक किसी ठोस फॉर्मूले के सामने नहीं आने को लेकर भी उठ रहे हैं और हर समय चुनावी मोड में रहने वाली बीजेपी को टक्कर देने के लिए विपक्ष का कोई ठोस विजन या एजेंडा सामने नहीं आने को लेकर भी. कांग्रेस की रणनीति पर भी सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं लेकिन एक पहलू यह भी है देश की सबसे पुरानी पार्टी के नेता जिसे प्रधानमंत्री पद के लिए चेहरा बताते हैं, उस नेता ने जब यात्रा की शुरुआत कर दी है तो उसके पीछे भी जरूर कोई रणनीति होगी. इस यात्रा के पीछे रणनीति की चर्चा से पहले यात्रा का रूट जान लेना भी जरूरी है.

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