
150 मौतें, 10 हजार घर तबाह... जानिए मणिपुर में हिंसा के 100 दिन बाद कैसे हैं हालात?
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मणिपुर ट्राइबल्स फोरम ने बताया कि आज मणिपुर हिंसा का 100वां दिन है. मणिपुर का जियो डेमोग्राफिक परिदृश्य स्थायी रूप से बदल गया है. अब तक राज्य में शांति स्थापित करने का कोई ठोस समाधान नहीं निकला है.
मणिपुर में 100 दिन से हिंसा जारी है. संसद में भी मणिपुर हिंसा को लेकर खूब हंगामा हुआ. अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया. गृह मंत्री अमित शाह और आखिर में पीएम मोदी ने जवाब भी दिया. मणिपुर के ताजा हालातों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया, ''मणिपुर में अब तक 150 लोगों की मौत हुई है. हिंसा को लेकर 11,006 मामले दर्ज किए गए हैं.'' राज्य में 10 हजार से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचाया गया है.
इसी बीच मणिपुर ट्राइबल्स फोरम दिल्ली ने गुरुवार को दावा किया कि हिंसा के 100 दिन बीत जाने के बावजूद मणिपुर में कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है. फोरम ने कहा कि मणिपुर में जारी हिंसा में अकेले आदिवासी (कुकी) समाज के 130 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि 55000 लोग बेघर हुए हैं.
मणिपुर ट्राइबल्स फोरम ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गुरुवार को कहा, ''आज मणिपुर हिंसा का 100वां दिन है. मणिपुर का जियो डेमोग्राफिक परिदृश्य स्थायी रूप से बदल गया है. हिंसा में अब तक 130 आदिवासी मारे गए हैं. जबकि आदिवासियों के 6000 से ज्यादा घरों को जला दिया गया. इसके चलते 55000 लोग बेघर हो गए और राहत शिविरों में रह रहे हैं. राज्य में शांति स्थापित करने का कोई ठोस समाधान नहीं निकला है.
इससे पहले बुधवार को अमित शाह ने संसद में कहा था कि मणिपुर में समस्याएं पड़ोसी म्यांमार से कुकी शरणार्थियों के आने के बाद से शुरू हुईं, जब वहां के सैन्य शासकों ने 2021 में उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की. शाह के बयान का जिक्र करते हुए फोरम ने कहा, कुकी शरणार्थियों के बारे में संसद में गृह मंत्री का बयान निराशाजनक था. न्याय और लोकतंत्र के अस्तित्व की खातिर सच्ची कहानी सामने लाने के लिए आरोपों पर गहन जांच की जानी चाहिए. क्या इस तरह का आरोप हिंसा के कृत्य को उचित ठहराता है?
शाह ने यह भी कहा था कि कुकी शरणार्थियों ने मणिपुर घाटी के जंगलों में बसना शुरू कर दिया है, जिससे क्षेत्र में जनसांख्यिकीय परिवर्तन की आशंका बढ़ गई है. शाह ने कहा, मणिपुर घाटी में अशांति तब शुरू हुई जब अफवाहें फैलने लगीं कि शरणार्थी बस्तियों को गांव घोषित कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि मैतेई लोगों को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश ने आग में घी डालने का काम किया.
अमित शाह ने बताए मणिपुर के ताजा हालात

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