
15 महीनों की कड़वी सच्चाई... पावरप्ले में ये साबित हो रही टीम इंडिया की असली कमजोरी
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टीम इंडिया की बल्लेबाजी पिछले कुछ महीनों में दो बिल्कुल अलग तस्वीरें पेश कर रही है- द्विपक्षीय सीरीज में 230-270 का तूफान और वर्ल्ड कप में पावरप्ले की हिचकिचाहट... विरोधियों ने नई गेंद से स्पिन आजमाकर भारत के टॉप ऑर्डर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है.
पिछले 15 महीनों में एक कड़वी सच्चाई बार-बार भारत के सामने आई है- स्पिन के खिलाफ असहजता. टेस्ट क्रिकेट में इसकी पहली दरार तब दिखी जब न्यूजीलैंड ने घर में ही भारतीय बल्लेबाजी की तकनीक और धैर्य दोनों को परखा. इसके बाद साउथ अफ्रीका ने, खासकर साइमन हार्मर की ऑफ स्पिन ने... उस कमजोरी को सिर्फ उजागर नहीं किया, बल्कि बेनकाब कर दिया. जो कभी मामूली तकनीकी खामी लगती थी, वह धीरे-धीरे पैटर्न बनती गई. अब वही परछाई टी20 वर्ल्ड कप के मंच पर भी दिखाई दे रही है- फॉर्मेट बदला है, ओवर घटे हैं, लेकिन स्पिन के सामने सवाल अब भी खड़े हैं.
वर्ल्ड कप से ठीक पहले भारत ने साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार दो पांच-पांच मैचों की सीरीज में जो बल्लेबाजी की, वह धमाकेदार थी. 230+ का स्कोर तीन बार (238/7 271/5 231/5), तिरुवनंतपुरम में 271 रन, पावरप्ले में 60+ आम बात और 10 रन प्रति ओवर तो जैसे नियम बन चुका था. अभिषेक शर्मा और ईशान किशन ने गेंदबाजों के मन में खौफ भर दिया था.
...लेकिन टी20 वर्ल्ड कप की तस्वीर बदली हुई है. अमेरिका, नामीबिया, पाकिस्तान और नीदरलैंड्स के खिलाफ जीत जरूर मिली, लेकिन वे जीतें 'तूफानी बल्लेबाजी' वाली नहीं थीं. पावरप्ले स्कोर- 46/4, 86/1, 52/1, 51/2 और 31/3. यह वही भारत नहीं दिखाता जिसने हाल ही में 270 पार किए थे.
पावरप्ले में ब्रेक क्यों?
कारण साफ हैं, और कठोर भी...
पहला- अभिषेक शर्मा का फॉर्म पूरी तरह ठंडा पड़ जाना. लगातार तीन 'डक'. दिलचस्प यह कि भारत का सबसे बड़ा पावरप्ले स्कोर (86/1) उसी दिन आया जब अभिषेक अस्पताल में थे और संजू सैमसन ने ईशान के साथ ओपनिंग की.

2003 के क्रिकेट वर्ल्ड फाइनल में भारतीय टीम खिताब जीतने के लिए मैदान पर उतरी थी, लेकिन कुछ ही घंटों में ये सपना टूट गया था. रिकी पोंटिंग की तूफानी पारी, वीरेंद्र सहवाग की अकेली जंग और 'स्प्रिंग बैट' की रहस्यमयी अफवाहों ने इस मुकाबले को सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और यादगार कहानी बना दिया.












