
12 महीने में 18वीं बार उदयपुर दौरे पर सीएम, आखिर दक्षिणी राजस्थान पर क्यों नजर गड़ाए हैं गहलोत?
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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का उदयपुर में पिछले 12 महीनों में यह 18वां दौरा है. लगातार मेवाड़ से जुड़े इलाको में गहलोत दौरे करते हुए अपनी पकड़ को मजबूत करने में जुटे हैं. पूर्वी राजस्थान में सचिन पायलट की ज्यादा लोकप्रियता और मारवाड़ के कई इलाको में कम होती पकड़ को देखते हुए गहलोत ने दक्षिणी राजस्थान पर ज्यादा फोकस शुरू किया है.
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी के दिग्गज नेता रहे गुलाबचंद कटारिया के राज्यपाल बनने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जैन वोटबैंक को पूरी तरह साधने के मूड में हैं. कहा जा रहा है कि उदयपुर शहर में जीतने के लिहाज से सबसे अधिक संख्याबल वाले समाज को साधकर गहलोत अपने साथ लाने में जुटे हैं. गहलोत का लक्ष्य कांग्रेस को मजबूत करने के साथ उनके करीबी नेता को प्रमोट करना भी है. मूल रूप से डूंगरपुर के रहने वाले एक जैन नेता को प्रमोट कर गहलोत उन्हें उदयपुर में लॉन्च करने की तैयारी में हैं. गहलोत के इस दांव के बाद अब उदयपुर से टिकट की ख्वाहिश रखने वाले कांग्रेस के स्थानीय नेताओं में खलबली मच गई है.
दरअसल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का उदयपुर में पिछले 12 महीनों में यह 18वां दौरा है. कटारिया के असम जाने के बाद से गहलोत मेवाड़ में अपना दौरा बढ़ाकर प्रचार की कोशिश भी काफी तेज कर दी है. जानकार बताते हैं कि गहलोत जानते हैं कटारिया के जाने के बाद मेवाड़ में उनकी जितनी बारीक समझ का नेता कोई नहीं है. बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष भले ही सीपी जोशी को बनाया है, मगर फिलहाल जनता के बीच उनका वो कद नहीं माना जाता. ऐसे में लगातार मेवाड़ से जुड़े इलाको में गहलोत दौरे करते हुए अपनी पकड़ को मजबूत करने में जुटे हैं.
असल में इन दौरों की सियासत के पीछे सिर्फ कटारिया का उदयपुर से जाना मात्र ही नहीं है. गहलोत चौथी बार सीएम बनने के लिए दक्षिणी राजस्थान में भी फोकस कर रहे हैं. पूर्वी राजस्थान में सचिन पायलट की ज्यादा लोकप्रियता और मारवाड़ के कई इलाको में कम होती पकड़ को देखते हुए गहलोत ने दक्षिणी राजस्थान पर ज्यादा फोकस शुरू किया है. गहलोत जानते हैं कि उदयपुर संभाग में पायलट के मुकाबले उनके पास विश्वनीय और समर्थक नेताओं की लंबी फौज है, ऐसे में वो आदिवासी इलाकों के साथ उदयपुर संभाग के 5 शहरों की सीटो पर किसी न किसी बहाने दौरे कर रहे है.
प्रताप जयंती के बहाने सीएम गहलोत ने मेवाड़ क्षत्रिय महासभा समेत राजपूत वर्ग को साधने को पूरी कोशिश की. वहीं इससे पहले उन्होंने हिरणमगरी इलाके में जैन समाज के सम्मेलन और सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के प्राकृत भवन का शिलान्यास किया. खास बात यह है कि यह दोनों कुछ महीने गुलाबचंद कटारिया के एक तरफा राज वाले कार्यक्रम मने जाते है.
सीएम गहलोत ने जैन समाज में कटारिया की कमी को भुनाने की कोशिश की तो महाराणा प्रताप के विवादित टिपण्णी के चलते नाराज चल रहे मेवाड़ क्षत्रिय महासभा को भी साधते हुए अपने नेताओं के कद को बढ़ाने का मौका ढूंढा. असल मे गहलोत ने अपने दौरे के दौर एक तीर से 2 निशाने लगाए. उन्होंने जैन समाज के कार्यक्रमो के जरिए डूंगरपुर जिलाध्यक्ष दिनेश खोड़निया को प्रमोट कर उदयपुर शहर से नई को बड़ी संभावनाओं को जन्म दिया है. वही विवादित बयानों के कारण कटारिया से खफा से चल रहे राजपूत नेताओं में उनकी समर्थक विधायक प्रीति शक्तावत का भी कद बढ़ाने का एक मौका नहीं छोड़ा.
बहरहाल मेवाड़ दौरे पर चल रहे राजनीति के जादूगर गहलोत ने सधी सियासत कांग्रेस के उदयपुर स्थानीय नेताओं के साथ बीजेपी के नेताओं में नई चर्चा को जन्म दे दिया है कि कटारिया के जाने बाद जैन समाज के सहारे गहलोत आगमी चुनाव तक उदयपुर में भी जादू करने के पूरे मूड में है.

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