
फारूक अब्दुल्ला और डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी के कार्यक्रम में गोलीबारी... निशाने पर थे पूर्व सीएम
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जम्मू के ग्रेटर कैलाश स्थित होटल रॉयल पार्क में एक शादी समारोह के दौरान फायरिंग की घटना से अफरा-तफरी मच गई. कार्यक्रम में नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक फारूक अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी मौजूद थे. फायरिंग के दौरान सुरिंदर चौधरी को छर्रे लगने से मामूली चोट आई, जबकि फारूक अब्दुल्ला सुरक्षित हैं. सुरक्षा कर्मियों ने हमलावर कमल सिंह जम्वाल को मौके पर ही पकड़ लिया. पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और घटना के कारणों की जांच जारी है.
जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में स्थित होटल रॉयल पार्क में आयोजित एक शादी समारोह के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कार्यक्रम में अचानक फायरिंग की घटना हो गई. इस समारोह में नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक फारूक अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और पार्टी के कई अन्य नेता मौजूद थे.
उपमुख्यमंत्री को छर्रे लगे जानकारी के अनुसार, समारोह के दौरान एक व्यक्ति ने पिस्तौल लहराते हुए फायरिंग कर दी. हालांकि मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हमलावर को काबू में कर लिया. बताया जा रहा है कि इस घटना में उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी को छर्रे लगने से मामूली चोट आई है, जबकि फारूक अब्दुल्ला पूरी तरह सुरक्षित हैं.
पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है. हमलावर की पहचान जम्मू के स्थानीय निवासी कमल सिंह जम्वाल के रूप में हुई है. फिलहाल पुलिस फायरिंग के पीछे की वजह का पता लगाने में जुटी हुई है.
इस समय पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है. घटना से जुड़े हर पहलू को समझने के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी देखी जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि सभी सबूतों और फुटेज का विश्लेषण करने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि फायरिंग की घटना किन परिस्थितियों में और किस वजह से हुई. फिलहाल पुलिस तथ्यों को इकट्ठा कर मामले की सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.

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अमित शाह ने स्पष्ट किया कि संसद में कौन कितना बोलेगा और क्या बोलेगा, इसका फैसला सत्ताधारी पार्टी नहीं बल्कि स्पीकर करते हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी विपक्ष की आवाज दबाई नहीं है, जबकि वर्तमान में विपक्षी दलों ने उनकी आवाज दबाने की कोशिश की है. उन्होंने 1975 की आपातकाल की घटना का संदर्भ देते हुए कहा कि उस वक्त विपक्ष की आवाज दबाने का काम हुआ था.

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