
Crypto Scam: हजारों करोड़ की ठगी के मामले में CBI का एक्शन, आरोपी आयुष वर्शनेय गिरफ्तार
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हजारों करोड़ रुपये के गेनबिटकोन (GainBitcoin) क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में CBI ने डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक और CTO आयुष वर्शनेय को गिरफ्तार किया है. आरोपी मुंबई एयरपोर्ट पर देश छोड़कर भागने की कोशिश करते वक्त पकड़ा गया. जानें क्या है पूरा मामला.
देश के चर्चित डार्विन लैब्स क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अहम आरोपी को गिरफ्तार किया है. CBI ने डार्विन लैब्स प्रा. लिं. (Darwin Labs Private Limited) के सह-संस्थापक और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) आयुष वर्शनेय को पकड़ा है. जांच एजेंसी के मुताबिक यह मामला हजारों करोड़ रुपये की ठगी से जुड़ा है, जिसमें निवेशकों को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भारी मुनाफे का लालच देकर पैसा निवेश करवाया गया था. बाद में यह रकम कथित तौर पर हड़प ली गई. इस मामले में कई तकनीकी प्लेटफॉर्म और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल कर ठगी का नेटवर्क तैयार किया गया था.
निवेशकों को भारी मुनाफे का लालच जांच के मुताबिक यह कथित पोंजी स्कीम वेरिएबलटेक प्राइवेट लिमिटेड (Variabletech Pte. Ltd.) नाम की कंपनी के जरिए चलाई गई थी. इस योजना के तहत लोगों को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया और उन्हें बहुत ज्यादा रिटर्न देने का वादा किया गया था. हजारों निवेशकों ने इस योजना में अपना पैसा लगाया. लेकिन बाद में सामने आया कि यह पूरी स्कीम फर्जी थी और निवेशकों से जुटाई गई रकम का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया. इसी वजह से देशभर में इस घोटाले से जुड़े कई मामले दर्ज हुए.
IPC और IT एक्ट की धाराओं में केस दर्ज CBI ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। जांच एजेंसी ने IPC की धारा 120B (आपराधिक साजिश), 406 (आपराधिक विश्वासघात) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया है. इसके अलावा आईटी एक्ट 2000 की धारा 66 भी इस केस में लगाई गई है. इन धाराओं के तहत आरोपियों पर साजिश रचकर निवेशकों से धोखाधड़ी करने और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर ठगी करने के आरोप लगाए गए हैं.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच गेनबिटकोन घोटाले से जुड़े कई राज्यों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज थीं. बाद में इस पूरे मामले की जांच को एक साथ करने के लिए 13 दिसंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी संबंधित मामलों की जांच CBI को सौंपी जाए. इसके बाद CBI ने इस घोटाले से जुड़े सभी मामलों को अपने हाथ में लेकर एक संयुक्त जांच शुरू की. जांच एजेंसी अब पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल सभी आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है.
कंपनी के संस्थापकों की भूमिका जांच के दौरान डार्विन लैब्स प्रा. लि. और उसके सह-संस्थापकों की भूमिका सामने आई. CBI के मुताबिक आरोपी आयुष वर्शनेय, साहिल बघला और निकुंज जैन इस कथित ठगी के तकनीकी ढांचे से जुड़े हुए थे. आरोप है कि इन लोगों ने MCAP नाम का क्रिप्टो टोकन और उससे जुड़ा ERC-20 स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट डिजाइन और विकसित किया था. इसी तकनीकी सिस्टम के जरिए निवेशकों से पैसा जुटाने की पूरी प्रक्रिया संचालित की जाती थी.
ठगी के लिए पूरा टेक्नोलॉजी नेटवर्क CBI की जांच में यह भी सामने आया कि डार्विन लैब्स प्रा. लि. ने इस कथित स्कीम के लिए पूरा तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया था. जिसमें GBMiners.com नाम का बिटकॉइन माइनिंग पूल प्लेटफॉर्म, बिटकॉइन पेमेंट गेटवे, Coin Bank नाम का बिटकॉइन वॉलेट और GainBitcoin का निवेशक पोर्टल शामिल था. इन सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए निवेशकों को स्कीम में पैसा लगाने के लिए जोड़ा जाता था और पूरी गतिविधि ऑनलाइन संचालित की जाती थी.

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