
हैवानियत की हदें पार... बच्चों के प्राइवेट पार्ट पर लगाया झंडु बाम और कपड़े उतारकर पीटा, अब कोर्ट ने दी जमानत
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महाराष्ट्र के पुणे में बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामले में एक आरोपी को तीन साल बाद हाई कोर्ट से जमानत मिल गई. आरोपी पर बच्चों के प्राइवेट पार्ट में झंडु बाम लगाने और कपड़े उतारकर बेल्ट से पीटने का आरोप था. हाई कोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि 'एफआईआर और आवेदक के खिलाफ एफआईआर में लगाए गए आरोपों को देखने के बाद रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे की पता चले कि आरोपियों की यौन इच्छा थी.
महाराष्ट्र के पुणे में तीन नाबालिग बच्चों का यौन उत्पीड़न करने और उनके प्राइवेट पार्ट में झंडु बाम लगाने के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 33 साल के एक आरोपी को जमानत दे दी है. उस पर अन्य आरोपियों के साथ मिलकर तीन लड़कों का यौन उत्पीड़न करने और उसका वीडियो बनाने का आरोप था. हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपी की कोई यौन इच्छा नहीं थी, पीड़ितों को शारीरिक और मानसिक यातना दी गई क्योंकि आरोपियों को लगा कि लड़के चोर थे.
3 साल बाद हाई कोर्ट ने दी जमानत
जस्टिस अनिल किलोर की पीठ ने आरोपी कपिल टाक की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद उसे जमानत दे दी. आरोपी कपिल टाक को 2021 में अप्राकृतिक अपराध, हमले और आपराधिक धमकी के आरोप में POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार किया गया था.
टाक पर अन्य लोगों के साथ मिलकर तीन नाबालिग लड़कों को निर्वस्त्र करने, चमड़े की बेल्ट से पीटने और प्राइवेट पार्ट में झंडू बाम लगाने का आरोप था. टाक पर पूरी घटना को मोबाइल फोन पर शूट करने का भी आरोप है.
इस पर सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, 'एफआईआर और आवेदक के खिलाफ एफआईआर में लगाए गए आरोपों को देखने के बाद रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे की पता चले कि आरोपियों की यौन इच्छा थी.
पीठ ने कहा कि मामला 'नाबालिग पीड़ितों को दी गई शारीरिक और मानसिक यातना' का था क्योंकि टाक और मामले के अन्य आरोपियों ने सोचा था कि वो (पीड़ित) चोर थे. टाक की वकील सना रईस खान ने तर्क दिया था कि POCSO एक्ट के प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होंगे क्योंकि आरोपी का कोई यौन इरादा नहीं था. उन्होंने आगे तर्क दिया कि टाक 2021 से जेल में बंद है और मामले में आरोपपत्र पहले ही दायर किया जा चुका है.

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