
हिमाचल के सियासी समर में कांग्रेस के अपने ही बागी बनेंगे पार्टी के लिए सिरदर्द!
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पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश में जोरदार सियासी उठापटक देखने को मिली. इस बीच कांग्रेस के कुछ बागी नेताओं तो अयोग्य घोषित कर दिया गया. इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होने वाली है, अब देखना ये है कि कांग्रेस बागी विधायक बीजेपी को किस तरह से फायदा पहुंचा सकते हैं.
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के अंदर आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बागियों के अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है. सत्तारूढ़ कांग्रेस के अंदर गुटबाजी से विपक्षी बीजेपी को फायदा होने की उम्मीद है. कांग्रेस सरकार हाल ही में हुए उलटफेर से भले ही बच गई हो, जब पार्टी के छह विधायकों ने बीजेपी को वोट दिया, लेकिन ऐसा लग रहा है कि यह राहत ज्यादा वक्त नहीं रहेगी.
पार्टी के बागी नेता और बीजेपी सुप्रीम कोर्ट में 15 मार्च की सुनवाई का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. अयोग्य ठहराए गए पार्टी के छह बागी विधायकों ने हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है और उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी सदस्यता बहाल हो जाएगी. 15 मार्च को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आए या न आए लेकिन अयोग्य विधायकों के पक्ष में आया तो कांग्रेस सरकार पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.
इस बीच, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रतिद्वंद्वी खेमे को कैबिनेट रैंक और नौकरियां देकर संतुष्ट करने की कोशिश की, लेकिन असंतोष की आग अभी भी भड़की हुई थी.
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यह सच है कि कांग्रेस विद्रोहियों को पार्टी में वापस लाने में सफल नहीं हुई. बागी और अयोग्य विधायक चैतन्य शर्मा के पिता और निर्दलीय विधायक आशीष शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज करने, एक अन्य बागी सुधीर शर्मा को AICC सचिव पद से हटाने और मनाली में बागी और अयोग्य विधायक रवि ठाकुर के घर की ओर जाने वाली सड़क को अवरुद्ध करने का फैसला उल्टा पड़ गया है. सीएम सुक्खू इन विद्रोहियों को 'काले सांप' और 'मेंढक' कहकर बुलाते रहे हैं और उन्हें विक्टिम कार्ड खेलने के लिए प्रेरित करते रहे हैं.
सूत्रों का कहना है कि जल्द ही एक और कांग्रेस विधायक बगावत कर सकता है, जिससे सियासी हालात बिगड़ेंगे. बीजेपी स्थिति पर करीब से नजर रख रही है और कांग्रेस पार्टी में असंतोष को बारीकी से देख रही है.

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