
'हिंदू नाम से फंसाया, कन्वर्जन के बाद सऊदी में बेचने की साजिश, इनकार पर गैंगरेप', छांगुर बाबा के चंगुल में फंसी युवती की आपबीती
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सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर राजू राठौड़ उर्फ वसीम से पहली बार मिली. गाड़ी में बैठते ही उसने कॉल पर किसी से कहा, सामान आ चुका है. मैं समझ नहीं सकी. वो सामान मैं थी. अगले कुछ घंटों में मेरा धर्म परिवर्तन होना था और ग्राहक शेखों की लिस्ट भी बन चुकी थी. ये बात है साल 2021 की. आज छांगुर बाबा जेल में है, लेकिन मेरी जिंदगी के चार साल गायब हो चुके.
उत्तर प्रदेश से धर्म परिवर्तन का रैकेट चला रहे जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा को कुछ रोज पहले गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद से रोज नया पन्ना खुल रहा है, बीते से ज्यादा दागदार- ज्यादा खौफनाक. हजारों परिवारों को बरगलाकर कन्वर्ट कराने वाले छांगुर का असल टारगेट थी- लड़कियां. पूरा गिरोह था, जो उन्हें फंसाकर अपना धर्म छोड़ने पर मजबूर कर देता. ऐसी ही एक महिला रश्मि ने aajtak.in से फोन पर बात की. कर्नाटक की रहने वाली युवती पिछले कुछ सालों में प्यार के नाम पर धोखा, कैद, गैंग रेप, मारपीट- सबसे गुजर चुकी.
साल 2019 का आखिर-आखिर था, जब बड़े भैया की मौत हो गई. उनके अलावा परिवार में कोई नहीं. उनके जाने के बाद मैं एकदम अकेली पड़ गई थी. इसी सूनेपन में राजू राठौड़ नाम से एक ID ने इंस्टाग्राम पर मुझसे बात करने की कोशिश की. मैं इग्नोर करती रही. कुछ वक्त बाद एक महिला भी आई, जो खुद को राजू की भाभी बताती. उसके कहने पर मेरी राजू से बोलचाल होने लगी. फोन नंबर भी लिए-दिए गए. वो खुद को राजपूत बताता. शक की कोई वजह नहीं थी. उसकी डीपी पर अक्सर किसी न किसी भगवान की फोटो लगी होती.
बातचीत होते-होते एक दिन उसने मुझे शादी का प्रस्ताव दे दिया. उसकी भाभी ने भी समझाया कि तुम्हारा परिवार नहीं. शादी कर लोगी तो हम लोग तुम्हारा परिवार बन जाएंगे. उन्हें समझ आ चुका था कि यही बात मेरी दुखती नस है. वो बार-बार बोलते रहे.
राजू सऊदी अरब में रहता था. मुझसे कहा गया कि उसके लौटने में अभी समय है, तब तक तुम भी दूसरा देश देख आओ. चाहोगी तो वहां नौकरी भी मिल जाएगी. परिवार भी बस रहा था और काम भी मिल रहा था. मैं राजी हो गई. कुछ रोज में मेरे पते पर फर्जी नाम का आधार कार्ड और फर्जी नाम का पासपोर्ट आ गया. हर डॉक्युमेंट पर फोटो मेरी ही लगी थी.
आपको तो तभी शक हो जाना चाहिए था? शक कैसे होता और किस पर! मैं कभी विदेश गई नहीं, न ही कोई ऐसे दोस्त-परिचित थे, जो कुछ बता सकते थे. मैं अकेली और मेरा फोन. वो जो कहते गए, मैं करती गई.
कर्नाटक में मेरा अपना घर था, जो भैया और मैंने मिलकर बनाया था. उसे बेच दिया. प्रोफेशनल ब्यूटिशियन हूं. अपना चलता हुआ पार्लर बेच दिया. मान लिया कि अब जो है, वही है. राजू कॉल करता तो पीछे सऊदी दिखता. ऊंची इमारतों और साफ सड़कों वाला. मैं इंटरनेट पर भी तस्वीरें देखती. तौर-तरीके और वहां की ‘लेडीज’ के मेकअप देखती ताकि सब समझ सकूं.

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