
'हिंदुओं को टारगेट बनाकर किया जा रहा अटैक', कनाडा की संसद में MP ने उठाया बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले का सवाल
AajTak
कनाडा के सांसद चंद्रा आर्य ने जारी बयान में कहा कि मैं बांग्लादेश में हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा को लेकर चिंतित हूं. हर बार जब बांग्लादेश में अस्थिरता पैदा होती है तो धार्मिक अल्पसंख्यकों विशेष रूप से हिंदुओं को इस आग में जलना होता है. 1971 में नए देश के रूप में बांग्लादेश के गठन के बाद से इस देश की आबादी में धार्मिक अल्पसंख्यकों की संख्या तेजी से घटी है.
भारतीय मूल के एक कनाडाई सांसद ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा का मामला उठाया है. उन्होंने कहा है कि वह बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा को लेकर बहुत चिंतित हैं.
कनाडा के सांसद चंद्रा आर्य ने जारी बयान में कहा कि मैं बांग्लादेश में हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा को लेकर चिंतित हूं. हर बार जब बांग्लादेश में अस्थिरता पैदा होती है तो धार्मिक अल्पसंख्यकों विशेष रूप से हिंदुओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. 1971 में नए देश के रूप में बांग्लादेश के गठन के बाद से इस देश की आबादी में धार्मिक अल्पसंख्यकों की संख्या तेजी से घटी है.
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में रह रहे कनाडाई हिंदुओं के परिवार अपने परिवार के सदस्यों और उनकी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने कहा कि ये लोग अगले हफ्ते 23 सितंबर को संसद के सामने एक रैली निकालने जा रहे हैं, जिसमें बांग्लादेश में हिंदुओं की मौजूदा स्थिति को उजागर किया जाएगा. इस रैली में बांग्लादेश में रह रहे कनाडाई बौद्धों और ईसाइयों के परिवार भी हिस्सा लेंगे.
बांग्लादेश के 27 जिलों में हिंदुओं पर हमले
बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से बड़े पैमाने पर हिंसा जारी है. इस बीच देश के 27 जिलों में हिंदुओं पर हमले हुए. बड़े पैमाने पर मंदिरों को भी निशाना बनाया जा रहा है. बांग्लादेश के जमात-ए-इस्लामी ने स्वीकार किया था कि बांग्लादेश में शेख हसीना के इस्तीफे के बाद अल्पसंख्यकों को निशाना जा रहा है. हिंदू मंदिरों को भी निशाना बनाया जा रहा है. वहीं, बांग्लादेश में अवामी पार्टी के नेताओं को भी मारा जा रहा है.उनके घरों में आग लगाई जा रही है.
कौन हैं चंद्रा आर्य?

अमेरिका ने IRGC के टॉप 5 अधिकारियों का पोस्टर जारी किया है. जिसमें जानकारी देने पर 10 मिलियन डॉलर के इनाम का एलान किया है. इससे पहले भी अमेरिका ने एक पोस्टर जारी किया था जिसमें ईरान के अधिकारियों पर इनाम रखा था. ये पोस्टर उस वक्त जारी किया गया है जब लगातार ईरान के टॉप कमांडरों के मारे जाने की खबरें आ रही हैं. देखें वीडियो.

इजरायल की Haifa Refinery पर हुए ईरानी हमले में अहम बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है. हमला रिफाइनरी से जुड़े एक थर्ड-पार्टी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुआ, जो ऑपरेशन के लिए जरूरी था. कंपनी के मुताबिक, कुछ दिनों में फिर से पूरी तरह संचालन शुरू होने की उम्मीद है. ज्यादातर प्रोडक्शन यूनिट्स फिलहाल चालू हैं. देखें वीडियो.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही मीडिया के सामने सेना भेजने की बात से इनकार किया हो, लेकिन 2,200 मरीन सैनिकों के साथ यूएसएस त्रिपोली युद्धपोत का मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ना कुछ और ही इशारा कर रहा है. ट्रंप का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के तेल मार्ग को ईरान के कब्जे से छुड़ाना और वहां दबे यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना है. अगर ये सेना तैनात होती है, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य कदम होगा.

महायुद्ध तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है...लेकिन बम-बारूद-गोले थम ही नहीं रहे ..। कहां तो युद्ध ईरान को न्यूक्लियर पावर बनने से रोकने के लिए शुरू हुआ...और कहां ये जंग तेल युद्ध बनकर दुनिया को धधका रहा है...। समझ नहीं आ रहा कि ये जंग किसे धुरंधर बना रहा...एक तरफ तबाही है...तो दूसरी तरफ तेल-गैस-हीलियम संकट...जो हर घर...हर परिवार पर असर डाल रहा है..

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध में अब तेल-गैस के ठिकानों पर हमले से तनाव बढ़ गया है. पूरे दुनिया पर ऊर्जा का संकट बढ़ता जा रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल के बाजार में पहले ही उथल-पुथल मची है. अब दोनों ओर से ताजा हमलों से पूरी दुनिया महंगाई के बड़े संकट की ओर बढ़ती जा रही है. देखें लंच ब्रेक.

चाहे हालात शांति के हों या युद्ध जैसे तनावपूर्ण, जिंदगी कभी नहीं रुकती, इसकी मिसाल लेबनान में देखने को मिली. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच यहां दुनिया के अलग-अलग देशों से आए हजारों लोग, जो काम के सिलसिले में लेबनान में रह रहे हैं, उन्होंने इजरायली हमलों और तमाम चुनौतियों के बावजूद ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया. संघर्ष और अनिश्चितता के बीच भी लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं.

होर्मुज को लेकर तनातनी जारी है. इस बीच छह देशों ने एक बयान जारी किया है ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड्स ने कहा है कि वे हॉर्मुज़ में सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं. हालांकि, इटली, जर्मनी और फ्रांस ने बाद में स्पष्ट किया कि वे तत्काल किसी सैन्य सहायता की बात नहीं कर रहे हैं. इन देशों ने क्या शर्त रखी है. जानें.






