
हाईवे पर पेट्रोल पंप, फूड कोर्ट या रास्ता चाहिए? एक क्लिक से होंगे सारे काम, Rajmarg Pravesh पोर्टल लॉन्च
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Rajmarg Pravesh Portal: राजमार्ग प्रवेशन पोर्टल उन सभी लोगों और संस्थाओं के लिए बनाया गया है, जिन्हें नेशनल हाईवे से जुड़ी जमीन या रास्ते से संबंधित अप्रूवल चाहिए. देश का नेशनल हाईवे नेटवर्क अब 1.45 लाख किलोमीटर से ज्यादा का हो चुका है. इसके साथ ही हाईवे के आसपास व्यापार, रिहायशी इलाके और सुविधाएं तेजी से बढ़ी हैं.
Rajmarg Pravesh Portal launch: देश के नेशनल हाईवे पर किसी भी तरह का काम करना अब पहले से ज्यादा आसान होने जा रहा है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राजमार्ग प्रवेश (Rajmarg Pravesh) वेब पोर्टल का अपग्रेडेड वर्जन लॉन्च किया है. यह पोर्टल नेशनल हाईवे से जुड़े नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी NOC और अन्य जरूरी अप्रूवल्स के प्रोसेस को एक ही जगह पर उपलब्ध कराएगा. इस नए पोर्टल का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया. इस मौके पर मंत्रालय, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और नेशनल हाईवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे.
राजमार्ग प्रवेशन पोर्टल उन सभी लोगों और संस्थाओं के लिए बनाया गया है, जिन्हें नेशनल हाईवे से जुड़ी जमीन या रास्ते से संबंधित अप्रूवल चाहिए. इसमें आम नागरिक, निजी कंपनियां और सरकारी विभाग सभी शामिल हैं. जैसे ही देश में नेशनल हाईवे नेटवर्क तेजी से बढ़ा है, वैसे ही इन मंजूरियों के लिए आने वाले आवेदनों की संख्या भी बढ़ गई है. इसी दबाव को कम करने के लिए यह डिजिटल व्यवस्था लाई गई है.
इस पोर्टल के जरिए कई तरह के अप्रूवल्स के लिए आवेदन किया जा सकता है. कोई व्यक्ति अपने निजी प्लॉट या इंडस्ट्री के लिए हाईवे से रास्ता लेना चाहता है तो वह भी इसी प्लेटफॉर्म से होगा. पेट्रोल पंप, ढाबा, रेस्ट एरिया, वेसाइड अमेनिटी या कनेक्टिंग रोड के लिए भी आवेदन किया जा सकेगा. इसके अलावा पानी की पाइपलाइन, गैस पाइपलाइन, ऑप्टिकल फाइबर केबल, बिजली लाइन जैसी सुविधाओं को हाईवे के किनारे या नीचे से ले जाने की अनुमति भी इसी पोर्टल से मिलेगी.
पहले इन सभी अनुमतियों के लिए अलग-अलग दफ्तरों और प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था. कई बार फाइलें हाथ से चलती थीं और रिजनल ऑफिसेज के चक्कर लगाने पड़ते थे. अब राजमार्ग प्रवेश पोर्टल इन सभी कैटेगरी को एक ही सिस्टम में लाता है. आवेदक अपने एप्लीकेशन का स्टेट्स भी ऑनलाइन देख सकते हैं और तय समय में जवाब पा सकते हैं.
इस पोर्टल से छोटे व्यापारियों से लेकर बड़ी कंपनियों तक को फायदा होगा. हाईवे के किनारे सुविधा केंद्र खोलने वाले छोटे कारोबारी, टेलीकॉम कंपनियां जो फाइबर बिछाना चाहती हैं, और राज्य सरकारें जो अपने प्रोजेक्ट के लिए यूटिलिटी क्रॉसिंग चाहती हैं, सभी के लिए अब प्रोसेस ज्यादा आसान और बेहतर होगा. सरकार लंबे समय से कारोबार और आम लोगों के लिए प्रक्रियाएं आसान बनाने पर जोर दे रही है. कागजी कामकाज को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में कई मंत्रालय काम कर रहे हैं.
मंत्रालय के मुताबिक इस पोर्टल से पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी. आवेदक यह देख सकेंगे कि उनका आवेदन किस स्तर पर है और कब तक फैसला आने की उम्मीद है. यह इन्वेस्टमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कामों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि मंजूरी में देरी से प्रोजेक्ट की लागत और समय दोनों बढ़ जाते हैं. यह पोर्टल पूरी तरह वेब पर बेस्ड है. इसके लिए किसी सरकारी दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं होगी. जरूरी दस्तावेज अपलोड किए जा सकते हैं, फीस ऑनलाइन जमा होगी और जवाब भी पोर्टल पर ही मिलेगा. इससे आवेदक और विभाग के बीच बेवजह की आवाजाही कम होगी.

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