
हर घर के लिए काम की बात, सोने की ज्वेलरी में हॉलमार्क क्यों जरूरी?
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लोग पाई-पाई जोड़कर सोने की ज्वैलरी खरीदते हैं. लेकिन जब उन्हें पता चलता है कि मुसीबत के लिए उन्होंने जो सोना खरीद रखा है, वो प्योर नहीं है, उसमें मिलावट है. इस तरह के धोखे से लोग असहाय महसूस करते हैं.
भारत में बड़े पैमाने पर लोग निवेश के नजरिये से सोना खरीदते हैं. खासकर देश में ज्वेलरी खरीदने की पुरानी परंपरा है. लोग पाई-पाई जोड़कर सोने की ज्वेलरी खरीदते हैं. लेकिन जब उन्हें पता चलता है कि मुसीबत के लिए उन्होंने जो सोना खरीद रखा है, वो प्योर नहीं है, उसमें मिलावट है. इस तरह के धोखे से लोग असहाय महसूस करते हैं. इस तरह के बहुत मामले सामने आते रहते हैं कि ज्वेलर ने उनके साथ धोखा किया है. ऐसे मामलों पर ही लगाम लगाने के लिए सरकार ने सोने की ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग अनिवार्य करने का फैसला लिया है. सरकार के इस कदम से सबसे ज्यादा फायदा आम जनता को होगा, क्योंकि उन्हें अब ज्वेलर गुमराह नहीं कर पाएगा. आप जो भी ज्वेलरी खरीदेंगे वह BSI से प्रमाणित होगी. साफ शब्दों में कहें तो हॉलमार्किंग लागू होने के बाद आम जनता प्योर सोने की ज्वेलरी खरीद पाएंगे, और ठगी के शिकार होने से बच जाएंगे. यही नहीं, हॉलमार्किंग शुद्धता का ऐसा पैमाना है, जिसे आप खुद चेक कर पाएंगे. अब फ्यूचर में ज्वेलरी खरीदने से पहले अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखेंगे तो प्योर गोल्ड खरीद पाएंगे.More Related News

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