
'हम रूस पर और प्रतिबंध लगाने को तैयार, लेकिन EU को भी उठाने होंगे कड़े कदम', बोले डोनाल्ड ट्रंप
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए यूरोप को भी अमेरिका जैसा सख्त रुख अपनाना होगा. उन्होंने NATO देशों से आग्रह किया कि वे रूस से तेल खरीदना बंद करें और चीन पर भी 50-100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही. ट्रंप ने G7 से भारत और चीन पर भी कड़ा कदम उठाने की अपील की है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे रूस पर और अधिक प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए यूरोप को अमेरिका की तरह कड़ा रुख अपनाना पड़ेगा. उन्होंने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि यूरोप अभी भी रूस से तेल खरीद रहा है, मैं नहीं चाहता कि वे ऐसा करें. जो प्रतिबंध यूरोप लगा रहा है, वह पर्याप्त नहीं हैं. मैं तो प्रतिबंध लगाने को तैयार हूं, लेकिन यूरोप को अपने प्रतिबंध अमेरिका के अनुरूप सख्त करने होंगे.
ट्रम्प ने NATO देशों से भी आग्रह किया कि वे रूस से तेल खरीदना बंद करें और उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं, इसके अलावा उन्होंने चीन पर भी सख्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि नाटो समेत अन्य देश मिलकर चीन पर 50 से 100 प्रतिशत टैरिफ लगाएं. ये टैरिफ तब तक लागू रहने चाहिए जब तक रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म नहीं हो जाता. उन्होंने कहा कि चीन का रूस पर बहुत प्रभाव है, इन टैरिफ से चीन की पकड़ कमजोर होगी.
G7 से भी कड़ा कदम उठाने की अपील अमेरिका ने G7 देशों से भी आग्रह किया कि वे उन देशों पर टैरिफ लगाएं जो रूस से तेल खरीदते हैं. उन्होंने खास तौर पर भारत और चीन को रूस के युद्ध अभियान में मददगार बताया है. G7 के वित्त मंत्रियों के साथ बातचीत के दौरान अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने कहा कि सिर्फ एकजुट प्रयास से ही रूस के युद्ध के लिए धन प्रवाह को रोक सकते हैं. तभी हम पर्याप्त आर्थिक दबाव डाल पाएंगे और इस युद्ध को समाप्त कर पाएंगे.
G7 में एकजुटता का संकेत
वर्तमान में G7 की अध्यक्षता करने वाला ओटावा यह भी स्पष्ट कर चुका है कि सदस्य देश मिलकर रूस पर दबाव बढ़ाएंगे. साथ ही वे यूक्रेन की दीर्घकालीन आर्थिक पुनर्प्राप्ति को भी सुनिश्चित करेंगे.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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