
हज जाते हैं हजारों भारतीय पर सऊदी अरब को रास नहीं आई हिंदी
AajTak
सऊदी अरब ने हज यात्रियों की सुविधा के लिए 14 भाषाओं में एक ई-गाइड जारी किया है. 10 हजार से अधिक पन्नों वाले ई-गाइड में हज से जुड़ी हर जानकारी को बड़े ही रोचक ढंग से पेश किया गया है. भारत, जहां से हर साल हजारों की संख्या में लोग हज के लिए जाते हैं, वहां की लोकप्रिय भाषा हिंदी को ई-गाइड में शामिल नहीं किया गया है.
भारत से हर साल हजारों की संख्या में मुस्लिम सऊदी अरब हज यात्रा पर जाते हैं. कोविड महामारी के कारण दो सालों तक यात्रा प्रतिबंध के बाद इस साल सऊदी अरब लगभग 10 लाख हज यात्री पहुंच रहे हैं. सऊदी ने विदेशों से आने वाले लोगों की सुविधा के लिए एक नई और अनूठी जागरूकता पहल शुरू की है. खाड़ी देश ने 14 भाषाओं में हज गाइड जारी किया है लेकिन भारत से बड़ी संख्या में हाजियों के जाने के बावजूद इसमें हिंदी को शामिल नहीं किया गया है.
विदेशी हज यात्रियों में एक बड़ा प्रतिशत भारत के लोगों का होता है, फिर भी हज गाइड जारी करते वक्त हिंदी की उपेक्षा की गई है. भारत की केंद्रीय हज समिति (Central Hajj Committee of India) के मुताबिक, भारत से इस बार 79 हजार 237 लोग हज यात्रा पर जा रहे हैं. इन यात्रियों के लिए 168 विशेष विमानों की व्यवस्था की गई है.
भारत से इतने अधिक संख्या में हाजियों के जाने के बावजूद भी सऊदी ने अपनी हज गाइड में हिंदी को शामिल नहीं किया है. हालांकि, उर्दू में गाइड जरूर जारी किया गया है.
विभिन्न भाषाओं में हज गाइड को हज और उमराह मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है. इस प्रयास का उद्देश्य जागरुकता बढ़ाना और लोगों के लिए हज से संबंधित जानकारी को उनकी भाषा में उपलब्ध कराना है ताकि विदेशी यात्रियों को परेशानी न हो.
हज गाइड में हज से संबंधित जानकारी के अलावा सभी प्रासंगिक मुद्दों को कवर किया गया है. ये ई- गाइड अरबी, अंग्रेजी, फ्रेंच, उर्दू, बंगाली, इंडोनेशियाई, मलय, हौसा, अम्हारिक, फारसी, स्पेनिश, तुर्की, रूसी और सिंहली भाषाओं में उपलब्ध है.
ई-गाइड में हज से संबंधित हर जानकारी रोचक और विस्तृत ढंग से दी गई है. ई-गाइड को रोचक बनाने के लिए उसमें तस्वीरों और वीडियो को भी शामिल किया गया है. 10 हजार 178 पन्नों वाले ई-गाइड को जनरल अथॉरिटी फॉर अवकाफ और अन्य सरकारी संगठनों के साथ मिलकर बनाया गया है.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









