
'स्पेशल कानून बनाते समय उसका असर क्यों नहीं सोचते?' CJI का केंद्र सरकार से तीखा सवाल
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दिल्ली में चेक बाउंस मामलों की बढ़ोतरी से न्यायिक प्रणाली पर दबाव बढ़ा है. कर्नाटक जातिगत हिंसा मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर कोर्ट ने राहत नहीं दी और गवाहों के बयान दर्ज करने पर जोर दिया. कोर्ट ने कहा कि बिना तैयारी के बनाए गए कानून न्यायिक प्रणाली पर बोझ डालते हैं और न्याय की गति धीमी करते हैं.
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक सुनवाई के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने केंद्र सरकार से कड़ा सवाल किया. उन्होंने कहा कि जब भी सरकार कोई खास (स्पेशल) कानून बनाती है तो ये क्यों नहीं देखा जाता कि उसका न्याय व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा.
CJI ने कहा कि जब आप कोई स्पेशल कानून बनाते हैं तो क्या आप कभी ये स्टडी करते हैं कि उससे कितने केस बढ़ेंगे और सिस्टम पर कितना दबाव पड़ेगा? उन्होंने हाल ही में आई एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि सिर्फ दिल्ली में ही धारा 138 (चेक बाउंस) के मामले पूरे सिस्टम को जाम कर रहे हैं.
CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा, 'आप कानून तो बना देते हैं, लेकिन उन मामलों को संभालने के लिए न तो कोर्ट बढ़ाते हैं और न ही ढांचा तैयार करते हैं.'
कर्नाटक के जातिगत हिंसा मामले की सुनवाई
ये टिप्पणी कर्नाटक में जातिगत हिंसा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान आई. इस केस में याचिकाकर्ता पर ‘टाइगर गैंग’ का सक्रिय सदस्य होने का आरोप है. उसे गैंग का रिंगलीडर बताया गया है जो कथित तौर पर हफ्ता वसूली और जबरन वसूली जैसे अपराधों में शामिल रहा है.
CJI की सख्त टिप्पणी: जेल में ऐश की बात

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