
स्टूडेंट्स के हिंसक विरोध प्रदर्शन से बांग्लादेश में बिगड़े हालात, एक पत्रकार समेत 19 की मौत
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हाई कोर्ट के आदेश पर बांग्लादेश में स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों के लिए सिविल सर्विसेज की एक तिहाई सीटें रिजर्व की गई थी. इसको लेकर स्टूडेंट्स सड़कों पर आ गए, जिसमें अब प्राइवेट स्कूल-कॉलेज के स्टूडेंट्स भी शामिल हो गए हैं. देश की सुप्रीम कोर्ट 7 अगस्त को हाई कोर्ट के आदेश पर सुनवाई करने वाला है और तब तक पीएम शेख हसीना ने स्टूडेंट्स से शांति बनाए रखने की अपील की है.
बांग्लादेश में रिजर्वेशन को लेकर चल रहा विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो उठा है. हाई कोर्ट के आदेश के बाद स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों के लिए सिविल सर्विसेज में एक तिहाई सीटें आरक्षित की गई थी, जिसको लेकर स्टूडेंट्स सड़कों पर उतर आए. बांग्लादेशी प्रशासन ने उनपर कहीं लाठियां बरसाईं तो कहीं आंसू गैस, जिसमें अब तक एक पत्रकार समेत 19 लोगों की मौत हो गई है और हजारों लोग घायल बताए जा रहे हैं.
बांग्लादेश के ढाका, चटगांव, रंगपुर और कुमिला सहित कई शहरों में लाठी और पत्थरों से लैस हजारों स्टूडेंट्स और पुलिस बलों के बीच झड़पें देखी गईं. यहां पांच पॉइंट दिए गए हैं, जिससे पता चलता है कि कैसे एक आंदोलन ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया. हिंसा बढ़ने की वजह से भारत और अन्य देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है.
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1. 19 लोग मारे गए, गुरुवार को सात मौतें
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बांग्लादेश में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं. राजधानी ढाका में गुरुवार को पुलिस के साथ झड़पों में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई. इसके साथ ही मरने वालों की संख्या 19 पर पहुंच गई है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो गुरुवार शाम चटगांव के बहादरहाट इलाके में पुलिस और स्टूडेंट्स झड़प में दो लोगों की मौत हो गई और 50 अन्य लोग घायल हो गए.
ढाका में बुधवार को पूर्ण बंद की अपील की गई थी और इस बीच सरकार ने स्टूडेंट्स को बातचीत के लिए भी निमंत्रण भेजा था लेकिन स्टूडेंट्स ने बातचीत करने से इनकार कर दिया. ढाका के जात्राबारी इलाके में विरोध-प्रदर्शन के कवरेज के दौरान एक 35 वर्षीय पत्रकार हसन मेहेदी की भी मौत हो गई. वह ढाका टाइम्स के रिपोर्टर थे.

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