
सोलर एनर्जी में 'मील का पत्थर' हो सकती है IIT दिल्ली के प्रोफेसर की ये रिसर्च
AajTak
IIT दिल्ली की टीम ने सामान्य हवा में पेरोव्स्काइट सोलर सेल्स तैयार करने में सफलता हासिल की है. यह पुराने तरीके से अलग है, जो मुश्किल एंटी-सॉल्वेंट प्रक्रियाओं पर निर्भर है. इस नए मैथड से पेरोव्स्काइट सोलर सेल्स निर्माण प्रक्रिया आसान और कम खर्चीली हो सकती है.
सोलर एनर्जी इंडस्ट्री में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT), दिल्ली के एक प्रोफेसर की रिसर्च बड़ी कामयाबी मानी जा रही है. आईआईटी दिल्ली में एनर्जी साइंस और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर त्रिलोक सिंह के नेतृत्व में रिसर्चर्स ने पेरोव्स्काइट सोलर सेल्स के विकास में एक बड़ी सफलता हासिल की है. उनकी रिसर्च से के जरिए सोलर सेल्स बनाने की प्रक्रिया को और आसान बनाया जा सकता है. साथ ही इस प्रक्रिया में आने वाले खर्च को भी काफी कम किया जा सकेगा.
आईआईटी दिल्ली की टीम ने सामान्य हवा में पेरोव्स्काइट सोलर सेल्स तैयार करने में सफलता हासिल की है. यह पुराने तरीके से अलग है, जो मुश्किल एंटी-सॉल्वेंट प्रक्रियाओं पर निर्भर है. इस नए मैथड से पेरोव्स्काइट सोलर सेल्स निर्माण प्रक्रिया आसान और कम खर्चीली हो सकती है. इससे पेरोव्स्काइट सोलर सेल्स का प्रोडक्शन बड़े पैमाने पर हो सकेगा.
रिसर्च में 'नमक' का खास योगदान
पेरोव्स्काइट सोलर सेल्स की आसान प्रक्रिया में गुआनिडिन सल्फेट नमक का विशेष योगदान है, जिसे स्थिरता बढ़ाने के लिए सेल में जोड़ा गया है. इससे सेल में आने वाले तनाव और दोष को कम करने में मदद मिली, जिससे इन सोलर सेल्स की एफिशिएंसी बढ़ेगी और ज्यादा समय तक टिका रहेगा. इन सोलर सेल्स ने 2000 घंटे के बाद भी अपनी 87 प्रतिशत मूल कार्यक्षमता बनाए रखी.
यह रिसर्च सोलर तकनीक में एक किफायती और प्रभावी विकल्प प्रदान कर सकता है. प्रो. सिंह और उनकी टीम का यह काम सोलर एनर्जी को अधिक आसान बना सकता है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो सके.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












