
सोनिया गांधी की कांग्रेस नेताओं को नसीहत, अपने विचार रखें, लेकिन बाहर एकता का संदेश जाए
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सोनिया गांधी ने कहा कि ऐसा समय आया है कि हमें संगठन के हितों के लिए काम करना होगा. सबसे आग्रह है कि खुलकर अपने विचार रखें, लेकिन बाहर एक ही संदेश जाना चाहिए.
कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चिंतन शिविर के उद्घाटन सत्र में पार्टी नेताओं को कड़ा संदेश दिया. उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि पार्टी ने नेताओं को बहुत कुछ दिया है. अब उनको पार्टी को लौटाने का वक्त है. सोनिया ने कहा इससे कड़ा संदेश मैं नहीं दे सकती. सोनिया ने कहा कि ऐसा समय आया है कि हमें संगठन के हितों के लिए काम करना होगा. सबसे आग्रह है कि खुलकर अपने विचार रखें, लेकिन बाहर एक ही संदेश जाना चाहिए. संगठन की मजबूती, दृढ़ निश्चय और एकता का. सोनिया गांधी ने कहा कि हमें देश की उम्मीदों के बारे में पता है. हम ये प्रण लेने के लिए इकट्ठे हुए हैं कि देश की राजनीति में कांग्रेस को उसी भूमिका में लेकर आएंगे, जिसमें वो पहले थी. जिस भूमिका की उम्मीद इस बिगड़ते समय में देश की जनता करती है. हम ये तय करें कि जब हम यहां से निकलें तो एक नए आत्मविश्वास और ऊर्जा के साथ निकलें.
सामूहिक प्रयासों से होगा पार्टी का उत्थान
पार्टी की नेता ने कहा कि आज हमारे सामने असाधारण परिस्थितियां हैं और इनका मुकाबला असाधारण तरीकों से ही किया जा सकता है. हर संगठन को जीवित रहने, बढ़ने के लिए अपने अंदर पैनापन लाना होता है. हमें सुधारों की सख्त जरूरत है. हमें रणनीतिक बदलाव, ढांचागत सुधार और रोजाना काम करने के तरीकों में बदलाव लेकर आना है. हमारा उत्थान सामूहिक प्रयासों से ही हो पाएगा. ये प्रयास आगे टाले नहीं जा सकते.
अल्पसंख्यक बराबर के नागरिक

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