
सेटेलाइट इमेज और मैप में देखें इजरायली स्ट्राइक में कितना हुआ ईरान का नुकसान, न्यूक्लियर साइट्स रहे टारगेट
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ईरान और इजरायल के बीच जारी मिसाइल और ड्रोन हमलों ने क्षेत्रीय शांति, अर्थव्यवस्था और आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया है. सेटेलाइट इमेज और मैप्स में दोनों देशों को हुए नुकसान को साफ देखा जा सकता है. इजरायल ने भारी सैन्य दबदबा दिखाते हुए ईरान की सैन्य क्षमताओं पर बड़ा वार किया है, जबकि इजरायल को कम नुकसान हुआ है.
ईरान और इजरायल के बीच दूसरे दिन शनिवार को भी भी मिसाइल और ड्रोन हमले जारी हैं, जिससे दोनों देशों को गंभीर नुकसान हुआ और पूरे वेस्ट एशिया क्षेत्र की शांति, अर्थव्यवस्था और आवाजाही प्रभावित हुई.
ईरान को अपने नागरिक और सैन्य ढांचे पर भारी नुकसान हुआ है, जिसमें परमाणु सुविधाएं और भूमिगत बैलिस्टिक मिसाइल साइटें भी शामिल हैं. इसके मुकाबले इजरायल में कम नुकसान हुआ है. हालांकि, राजधानी तेल अवीव में ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों द्वारा हुआ विनाश दशकों में पहली बार देखा गया है.
किसका पलड़ा भारी है?
स्पष्ट रूप से इजरायल का! इजरायली सेना ने तेहरान पर जोरदार हमला करते हुए उसकी शीर्ष सैन्य नेतृत्व को खत्म कर दिया और ईरान की सैन्य क्षमताओं को गहरी चोट दी. शुक्रवार सुबह से ही इजरायली लड़ाकू विमानों ने तेहरान और अन्य शहरों में लगातार बमबारी की, जिसमें न तो कोई विमान गिरा और न ही कोई पायलट मारा गया. इजरायली सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ़्रिन ने कहा कि इन हमलों में 200 फाइटर जेट्स ने करीब 100 ठिकानों को निशाना बनाया.
इसके जवाब में ईरान ने 100 से अधिक ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों की कई लहरें इजरायल पर दागीं, जो मुख्य रूप से सेंट्रल इजरायल पर केंद्रित थीं. अधिकारियों ने दावा किया कि इनमें से अधिकांश ड्रोन इजरायली सीमा में प्रवेश करने से पहले ही मार गिराए गए.
इजरायल की मजबूत एयर डिफेंस ने अधिकांश बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ मिसाइलें जमीन पर गिरने में सफल रहीं और उन्होंने आवासीय इमारतों और दफ्तरों को नुकसान पहुंचाया. ईरान द्वारा निशाना बनाया गया सबसे अहम ठिकाना तेल अवीव स्थित इजरायली सेना का मुख्यालय ‘किर्यात’ बताया गया है, जैसा कि Fox News ने रिपोर्ट किया.

ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले को लेकर मचे घमासान के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कल मीडिया के सामने आकर युद्ध को लेकर कई बड़ी बातें कहीं नेतन्याहू ने ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका को घसीटने की फर्जी खबरों का खंडन किया. कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति हमेशा वही निर्णय लेते हैं जो उन्हें अमेरिका के हित में लगता है. उन्होंने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के दौरान इजरायल और अमेरिका के तालमेल की भी प्रशंसा की.

जिस ईरान को बर्बाद करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप निकले थे. अब लगता है कि उनका पैर उसी ईरान के 'तेल' पर फिसल गया है. और इसलिए वो एक बार फिर पूरी दुनिया को 'चौंकाने' वाला फैसला ले सकते हैं. और ये फैसला ईरान के तेल की Sale से जुड़ा है. ईरान को पूरी तरह से अलग-थलग करने और हर चीज के लिए 'मोहताज' बनाने की कोशिश करने वाले ट्रंप अब खुद ईरान के तेल से प्रतिबंध हटा सकते हैं. और तेल की Sale करने की अनुमति दे सकते हैं? अब सवाल ये है कि जब ट्रंप खुद ईरान के तेल की बिक्री के लिए तैयार हैं, तो वो ईरान से युद्ध क्यों लड़ रहे हैं? क्या वाकई ईरान ने ट्रंप को ऐसा करने के लिए मजबूर कर दिया है, या ट्रंप अपने ही फैसलों की फांस में फंस चुके हैं?











