
सुप्रीम कोर्ट में UGC के नए नियमों के खिलाफ PIL पर आज होगी सुनवाई, CJI जस्टिस सूर्यकांत खुद सुनेंगे मामला
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यूजीसी के नए भेदभाव विरोधी नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका है. नियमों के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है, जिनमें ओबीसी, एससी, एसटी, महिलाओं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व जरूरी होगा, जबकि सामान्य वर्ग को संभावित पीड़ित के रूप में शामिल नहीं किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट आज विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए 'भेदभाव विरोधी नियमों' को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा. यह मामला मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने लिस्ट किया गया है. बुधवार को याचिका का उल्लेख किए जाने पर अदालत ने तत्काल सुनवाई के लिए सहमति जताई थी.
याचिकाकर्ता का तर्क है कि यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं. अदालत के सामने कहा गया कि इन नियमों को लेकर देशभर में विरोध हो रहा है. इस पर पीठ ने कहा कि वह स्थिति से अवगत है और याचिका में मौजूद तकनीकी खामियों को दूर करने के निर्देश दिए.
क्या कहते हैं यूजीसी के नए नियम?
यूजीसी के नए नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता समितियों (equity committees) का गठन अनिवार्य किया गया है. इन समितियों का काम भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच करना और समानता को बढ़ावा देना होगा. नियमों के अनुसार इन समितियों में अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं और दिव्यांगों के प्रतिनिधियों को शामिल करना जरूरी होगा.
नए नियमों के दुरुपयोग की आशंका ये नए नियम वर्ष 2012 के पुराने नियमों की जगह लाए गए हैं, जो सलाहात्मक प्रकृति के थे. आलोचकों का कहना है कि नए नियमों में प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं है और इनके दुरुपयोग की आशंका है. यह भी आरोप लगाया गया है कि नया ढांचा ओबीसी समुदायों के सदस्यों को भी संभावित पीड़ितों के रूप में शामिल करता है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों को इससे बाहर रखता है. उनका दावा है कि इस तरह से सामान्य वर्ग को बाहर रखना उन्हें जाति आधारित भेदभाव का स्थायी दोषी साबित करने जैसा है.

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