
सिगरेट-बीड़ी ही नहीं, बाल से भी 100 गुना पतला कण बना आफत... समझें- कैसे नॉन-स्मॉकर्स को हो रहा लंग कैंसर
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लंग कैंसर अब स्मोकिंग करने वालों को ही नहीं, बल्कि नॉन-स्मोकर्स को भी अपना शिकार बना रहा है. हाल ही में एक स्टडी आई है, जिसमें बताया गया है कि भारत में लंग कैंसर के आधे से ज्यादा मरीन नॉन-स्मोकर्स हैं. ऐसे में जानते हैं कि सिगरेट-बीड़ी नहीं पीने वाले लोग कैसे लंग कैंसर की पीड़ित बन जा रहे हैं.
लंग कैंसर को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. एक नई स्टडी में सामने आया है कि भारत में लंग कैंसर युवाओं में तेजी से फैल रहा है. हैरान करने वाली एक बात ये भी है कि लंग कैंसर के ज्यादातर मरीज वो हैं, जिन्होंने कभी स्मोकिंग नहीं की.
साइंस जर्नल 'लैंसेट' में साउथईस्ट एशिया में लंग कैंसर पर एक स्टडी छपी है. इसमें बताया गया है कि अब लंग कैंसर तेजी से नॉन-स्मोकर्स में भी फैलता जा रहा है.
इस स्टडी के मुताबिक, लंग कैंसर तीसरा सबसे ज्यादा होने वाला कैंसर है. इसमें बताया गया है कि 2020 में दुनियाभर में लंग कैंसर के 22 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए थे, जबकि लगभग 18 लाख लोगों की मौत हो गई थी. वहीं, 2020 में भारत में लंग कैंसर के 72,510 नए मरीज मिले थे और उस साल इससे 66,279 मरीजों की मौत हो गई थी. भारत में 2020 में कैंसर से जितनी मौतें हुईं, उनमें से 7.8% लंग कैंसर के कारण हुई थीं.
लंग कैंसर पर डराते दो आंकड़े
- पहलाः स्टडी में बताया गया है कि भारत में लंग कैंसर का पता चलने की औसत उम्र पश्चिमी देशों की तुलना में 10 साल कम है. भारत में लंग कैंसर होने की औसत उम्र 28.2 साल है. हालांकि, इसकी एक वजह भारत की युवा आबादी भी हो सकती है. पश्चिमी मुल्कों में लंग कैंसर का पता 54 से 70 साल की उम्र के बीच चलता है. जबकि, अमेरिका में औसत उम्र 38 साल और चीन में 39 साल है.
- दूसराः भारत में फेफड़ों का कैंसर तेजी से फैल रहा है. 1990 में भारत में हर एक लाख आबादी पर लंग कैंसर की दर 6.62 थी, जो 2019 में बढ़कर 7.7 हो गई. यानी, 2019 में हर एक लाख लोगों में से 7.7 लोग लंग कैंसर से पीड़ित थे. 1990 से 2019 के दौरान यही पुरुषों में 10.36 से बढ़कर 11.16 और महिलाओं में 2.68 से 4.49 हो गई है.

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