सिंगापुर की राष्ट्रपति ने रेप पर कानून सख्त करने की उठाई मांग, बोलीं- बच्चों के Rapists को मारे जाए बेंत
AajTak
सिंगापुर की दंड संहिता के तहत, एक दोषी बलात्कारी को 20 साल तक की जेल और जुर्माना या बेंत मारने की सजा हो सकती है. हालांकि 50 वर्ष और उससे अधिक आयु वालों को बेंत से मारने की सजा नहीं दी जा सकती है, लेकिन शारीरिक दंड के बदले उसे अधिक समय तक कैद किया जा सकता है.
सिंगापुर की राष्ट्रपति हलीमा याकूब ने सोमवार को 50 साल या उससे अधिक उम्र के बलात्कारियों को बेंत मारने का आह्वान किया. साथ ही उन्होंने हाल ही में अपने ही घरों में पिताओं द्वारा लड़कियों के साथ बलात्कार किए जाने के मामलों पर भी निराशा व्यक्त की. दरअसल, सिंगापुर की दंड संहिता के तहत, एक दोषी बलात्कारी को 20 साल तक की जेल और जुर्माना या बेंत मारने की सजा हो सकती है. हालांकि 50 वर्ष और उससे अधिक आयु वालों को बेंत से मारने की सजा नहीं दी जा सकती है, लेकिन शारीरिक दंड के बदले उसे अधिक समय तक कैद किया जा सकता है.
चैनल न्यूज एशिया ने बताया कि पिछले हफ्ते देश में एक 54 वर्षीय व्यक्ति को अपनी बेटी से बार-बार छेड़छाड़ करने के लिए जेल की सजा सुनाई गई थी, जब वह 10 साल की थी. एक फेसबुक पोस्ट में, राष्ट्रपति याकूब ने लिखा, "बलात्कारियों को सिर्फ इसलिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए क्योंकि वे पचास वर्ष के हैं. यह विडंबना है कि वे जीवन भर पीड़ितों से क्रूरता करने के बाद भी बेंत की सजा से बच जाते हैं."
पोस्ट में कहा गया है, "कुछ मामलों में, बलात्कार पहले किए गए थे, लेकिन अपराधी के पचास साल के होने के बाद ही रिपोर्ट किए गए. यह समय है कि हम इस कानून की समीक्षा करें. अपने युवाओं की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है और हमें उन्हें निराश नहीं करना चाहिए."
बता दें कि पिछले साल सितंबर में संसद सदस्यों ने सुझाव दिया था कि बेत मारने की उम्र सीमा बढ़ा दी जाए. सांसद मुरली पिल्लई ने कहा, "मुझे समझ नहीं आता कि संसद बार-बार यौन अपराधी के पक्ष में क्यों है कि वह छड़ी से मारने के लायक नहीं है, जबकि वह इस तरह के जघन्य कृत्य करने के लिए स्पष्ट रूप से फिट है."
बता दें कि नवंबर में, एक व्यक्ति ने स्वीकार किया कि उसने अपनी चार साल की बेटी के साथ दो बार बलात्कार करने की कोशिश की, जबकि एक अन्य पिता ने 12 साल की उम्र में अपनी बेटी का बलात्कार करने से पहले आठ साल तक उससे छेड़छाड़ की.
राष्ट्रपति ने लिखा, "हाल ही में अपने ही घरों में बच्चों के साथ उनके पुरुष रिश्तेदारों द्वारा बलात्कार के मामलों ने बेहद परेशान किया है. हमें अपने बच्चों को ऐसे यौन शिकारियों से बेहतर ढंग से बचाने की जरूरत है. दोषी अपराधियों के लिए कड़ी सजा महत्वपूर्ण है, लेकिन ये पर्याप्त नहीं है. हमें अपने बच्चों की मदद करने और उन्हें ऐसे बलात्कारियों के शिकार होने से रोकने के लिए अन्य तरीकों को देखने की जरूरत है."

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.







