
सलमान रुश्दी पर जानलेवा अटैक, जानें क्यों कट्टरपंथियों के निशाने पर है यह लेखक
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लेखक सलमान रुश्दी पर न्यूयॉर्क में जानलेवा हमला हुआ है. अभी वह जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं. मिडनाइट चिल्ड्रन, जैसी कहानी रचने के लिए उन्हें 1981 में बुकर अवार्ड मिला था, लेकिन 'द सैटेनिक वर्सेज' उनके जीवन की वो लेखनी है, जिससे पैदा हुए विवादों ने उनका कभी साथ नहीं छोड़ा.
आने वाली 15 अगस्त को भारत अपनी आजादी के 75 साल पूरे करने जा रहा है. भारत को ये आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली और इससे लगभग दो महीने पहले 19 जून 1947 को मुंबई में सलमान रुश्दी का जन्म हुआ. जो अब बड़े लेखक के रूप में पहचाने जाते हैं. आजादी के दिन आधी रात को पैदा होने वाले बच्चों पर उन्होंने 'मिडनाइट चिल्ड्रन' जैसी कालजयी कहानी रची और इसी उपन्यास ने उन्हें 1981 में पहले उन्हें बुकर अवार्ड दिलाया और बाद में वह 'बुकर ऑफ द बुकर्स' जैसा सम्मान पाने वाले लेखक भी बने.
अब सलमान रुश्दी पर न्यूयॉर्क में चाकू से हमला किया गया है. अभी वो जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं, लेकिन इस तरह का हमला करने और जान से मारने की धमकी उन्हें काफी पहले से मिलती रही है.
सलमान रुश्दी की 'द सैटेनिक वर्सेज' किताब ने ऐसे विवादों को जन्म दिया, जो जिंदगीभर उनके साथ बने रहे. उनकी इस किताब को इस्लाम विरोधी और ईश निंदा करने वाला माना गया. इसी वजह से 1980 के दशक में उन्हें ईरान से जान से मारने की धमकियां मिलीं. ये किताब 1988 से ही ईरान में बैन है, लेकिन इसकी वजह से सलमान रुश्दी हमेशा चरमपंथियों के निशाने पर रहे.
ईरान से निकाला था फतवा
सलमान रुश्दी को ईरान से मिली धमकी किसी भी हालत में मामूली नहीं थी. क्योंकि उन्हें मारने वाले को 30 लाख डॉलर इनाम देने का ऐलान हुआ था. वहीं ईरान में गणतंत्र के संस्थापक और देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह रुहोल्ला ख़ुमैनी ने उनके खिलाफ 1989 में फतवा भी जारी किया था. हालांकि बाद में ईरान की सरकार ने इसे उनका निजी विचार बताते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया था.
साल 2012 में भी सलमान रुश्दी को जान से मारने की धमकी मिली और ईरान के एक धार्मिक संगठन ने ईनाम की राशि को बढ़ाकर 33 लाख डॉलर कर दिया.

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