
सरगुजा के 'किंग', राजघराने से संबंध... जानें छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव की सियासी ताकत
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छत्तीसगढ़ में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव हैं. इससे कुछ महीने पहले कांग्रेस ने बड़ा फैसला लिया. कांग्रेस ने टीएस सिंहदेव को डिप्टी सीएम बना दिया है. सिंह देव छत्तीसगढ़ के दिग्गज नेता माने जाते हैं. उनकी सरगुजा संभाग में मजबूत पकड़ मानी जाती है और सरगुजा संभाग को सत्ता की चाबी माना जाता है.
कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव को छत्तीसगढ़ का डिप्टी सीएम बना दिया है. सीएम भूपेश बघेल ने उनकी नियुक्ति की सराहना की. उन्होंने ट्वीट किया,'डिप्टी सीएम के रूप में जिम्मेदारी मिलने पर महाराज साहब को बधाई और शुभकामनाएं.' हालांकि चर्चा है कि सिंहदेव की सीएम बघेल के साथ जारी खींचतान को खत्म करने, प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी कलह रोकने और साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने यह कदम उठाया है. हालांकि कांग्रेस के इस फैसले पर बीजेपी ने तंज कहा है. पूर्व सीएम और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रमन सिंह ने ट्वीट किया,'जब डूबने लगी कश्ती तो कप्तान ने कुछ किया, सौंप दी है पटवार आधे दूसरे के हाथ में. महाराज जी को बचे हुए 4 महीनों के लिए बधाई.'
आइए यह समझते हैं कि कांग्रेस को चुनाव से कुछ महीने पहले टीएस सिंहदेव को मनाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या वजह है कि तीखे तेवर अख्तियार करने के बाद भी कांग्रेस सिंहदेव को नजरअंदाज नहीं कर पाई?
दिल्ली में बुधवार रात जारी पार्टी के एक बयान में कहा गया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सिंहदेव (70) को डिप्टी सीएम नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. यह निर्णय छत्तीसगढ़ के शीर्ष कांग्रेस नेताओं द्वारा दिन में नई दिल्ली में आयोजित बैठक में छत्तीसगढ़ में पार्टी की रणनीति और चुनाव तैयारियों पर चर्चा के बाद आया. इस बैठक में अध्यक्ष खड़गे के अलावा पूर्व पार्टी प्रमुख राहुल गांधी, छत्तीसगढ़ के सीएम बघेल, राज्य की पार्टी प्रभारी कुमारी शैलजा और महासचिव केसी वेणुगोपाल शामिल थे.
अंबिकापुर के विधायक टीएस सिंहदेव कांग्रेस के प्रमुख नेता हैं. छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्से सरगुजा में उनकी मजबूत पकड़ है. इतना ही नहीं सरगुजा शाही परिवार के वंशज सिंहदेव पार्टी में आलाकमान के भरोसेमंद भी हैं.
सिंहदेव का 6 जिले से बने सरगुजा संभाग की 14 सीटों पर सीधे असर माना जाता है. इस संभाग को छत्तीसगढ़ के सत्ता की चाबी भी कहा जाता है. यही वजह है कि 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने इन्हीं सीटों पर बड़े वोटों के अंतर से अपनी जीत दर्ज कराई थी, इसलिए सभी दलों की नजर सरगुजा संभाग पर रहती है.
कांग्रेस ने टीएस सिंहदेव को डिप्टी सीएम बनाने का फैसला यूं ही नहीं ले लिया. दरअसल 13 जून को सिंहदेव ने अंबिकापुर में कांग्रेस के संभागीय सम्मेलन में यह बयान दिया था कि दिल्ली में उन्होंने बीजेपी के केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की थी. उन्हें बीजेपी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन वह बीजेपी में नहीं शामिल होंगे. उनके इस बयान के बाद यह अटकलें लगने लगी थीं कि वह कांग्रेस छोड़ सकते हैं. अगर वह चुनाव से पहले पार्टी बदल लेते तो कांग्रेस को इसका भारी नुकसान उठाना पकड़ सकता था.

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