
सड़क, साजिश और खून से लथपथ लाश... खौफनाक है झांसी की पहली महिला ऑटो ड्राइवर के कत्ल की इनसाइड स्टोरी
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झांसी की पहली महिला ऑटो ड्राइवर अनिता चौधरी की स्टेशन रोड पर गोली मारकर हत्या कर दी गई. पहले इस मामले को हादसा समझा गया, लेकिन जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई तो कत्ल का खुलासा हुआ. तब तक मुख्य आरोपी फरार हो चुका था. पढ़ें ये सनसनीखेज कहानी.
Jhansi Woman Auto Driver Anita Chaudhary Murder: वो झांसी की पहली महिला ऑटो ड्राइवर थी. जब उसने परिवार का पेट पालने के लिए ऑटो चलाने का फैसला किया था, तो ज्यादातर लोग उसके खिलाफ थे. उन्हें पसंद नहीं था कि एक महिला ड्राइवर बनके ऑटो चलाए. अब वो महिला ड्राइवर इस दुनिया में नहीं है. अचानक उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई है. जुर्म की ये कहानी आपको सन्न कर देगी.
4 जनवरी 2026, रविवारझांसी पुलिस को रात के करीब ढाई बजे एक कॉल मिली. कॉल करने वाले ने बताया कि स्टेशन रोड पर एक ऑटो का एक्सिडेंट हो गया है और एक महिला बुरी तरह से जख्मी हालत में पड़ी है. पुलिस की टीम फौरन मौका-ए-वारदात पर पहुंची. जहां सड़क के बीचों-बीच एक ऑटो बिल्कुल सिर के बल उल्टा पड़ा था. उसके शीशे चकनाचूर हो चुके थे और पास ही पड़ी थी खून से लथपथ एक महिला. लेकिन जैसे ही पुलिस ने महिला को संभालने की कोशिश की, तो ये देख कर चौंक गई कि ये महिला कोई और नहीं बल्कि झांसी की पहली महिला ऑटो ड्राइवर अनिता चौधरी थी.
ऑटो के नीचे दबने की वजह से अनिता की मौत हो चुकी थी. उसका जिस्म ठंडा पड़ चुका था. आनन-फानन में उसे उठा कर अस्पताल ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने उसे ब्रॉट डेड बता कर उसकी मौत की पुष्टि कर दी. और इसी के साथ झांसी की पहली महिला ऑटो ड्राइवर की हौसले और जज्बे से भरी इस कहानी का एकाएक अंत हो गया. असल में अनिता चौधरी वो महिला थी, जिसने झांसी शहर में पहली बार ऑटो चलाने जैसे मुश्किल पेशे को चुना और इसके लिए कई चुनौतियों का सामना भी किया. अंग्रेज़ों से टकराने वाली रानी लक्ष्मीबाई के शहर झांसी की अनिता की ये स्टोरी लोगों को प्रेरित और प्रभावित करती थी. ऐसे में अनिता की मौत से पूरा शहर सदमे में आ गया.
वैसे तो पहली नजर में ये मामला रोड एक्सिडेंट का ही लग रहा था. लेकिन जब अनिता के शव का पोस्टमार्टम करवाया गया था, तो एक ऐसी बात सामने आई जिसने झांसी के आम लोगों के साथ-साथ खुद पुलिस वालों को भी चौंका दिया. आपको पोस्टमार्टम रिपोर्ट से अनिता की मौत के मामले में आए ट्विस्ट के बारे में बताएंगे, लेकिन पहले ये जान लीजिए कि आखिर पूरे शहर में अनिता की एक अलग और खास पहचान क्यों थी?
असल में ऑटो चलाने से पहले अनिता एक कंपनी में नौकरी करती थी. लेकिन पंद्रह साल तक नौकरी करने के बावजूद साल 2020 में एक रोज उसकी अपने सुपरवाइजर से कहासुनी हो गई. बात खुद्दारी पर आई तो अनिता ने नौकरी छोड़ दी और नई शुरुआत करने के इरादे से झांसी से महाराष्ट्र चली गई. ये उन्हीं दिनों की बात थी, जब कोरोना अपने पांव पसारने लगा था. लिहाजा, लॉक डाउन के डर से अनिता को घर लौटना पड़ा. यहां आकर उसने ऑटो चलाने की ठानी. लेकिन दिक्कत ये थी कि कोई भी बैंक इसके लिए अनिता को लोन देने को तैयार नहीं था.
यहां तक कि खुद अनिता के पति ने भी तब अनिता के ऑटो चलाने का फैसले का विरोध किया था और लोन हासिल करने में कोई भी मदद नहीं की थी. लेकिन अनिता की कोशिश चलती रही और आखिरकार उसने लोन हासिल कर ही लिया और नई ऑटो खरीद ली. इसके बाद उसने ऑटो चलाना सीखा और काम में जुट गई. उसके इसी जज्बे को देखते हुए शहर के कई संस्थाओं के साथ-साथ तत्कालीन डीआईजी जोगेंद्र सिंह ने भी उसे सम्मानित किया. जिसके बाद धीरे-धीरे कई और महिलाओं ने ऑटो और ई-रिक्शा ड्राइविंग जैसे पेशे को अपनाया.

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