
सचिन वाजे: एक केस में माफी, एक में बेल... लेकिन इन मुकदमों में चलता रहेगा केस
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मुंबई पुलिस के पूर्व अफसर सचिन वाजे के खिलाफ चार दर्ज मामलों में से एक में उन्हें जमानत जबकि दूसरे में माफी मिल गई है. फिलहाल दो मामले उनके खिलाफ दर्ज हैं. इन दोनों मामलों में सचिन वाजे की मुश्किलें बढ़ सकतीं हैं.
मुंबई के पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के खिलाफ दर्ज चार में से एक मामले में माफी दे दी गई है जबकि एक अन्य मामले में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है. बता दें कि इसी सप्ताह वाजे को अनिल देशमुख केस में सरकारी गवाह बनने के बाद मुंबई की विशेष कोर्ट ने माफी दे दी थी. मुंबई पुलिस के पूर्व अफसर की मुश्किलें अभी भी कम होती नहीं दिख रही है.
1990 में महाराष्ट्र पुलिस में शामिल हुए सचिन वाजे को इससे पहले 2002 के घाटकोपर बम विस्फोट के एक आरोपी ख्वाजा यूनुस की हिरासत में मौत के बाद उन्हें पहली बार सेवाओं से निलंबित किया गया था. तब से चल रहे इस मामले में वह अभी भी मुकदमे का सामना कर रहे हैं. इस मामले में उन्हें निलंबित रहने के दौरान अदालत ने जमानत दे दी थी.
हिरासत में आरोपी की मौत मामले में वाजे कर रहे कोर्ट का सामना
पहले गवाह की गवाही के बाद मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने एक आवेदन दिया जिसमें वाजे और उसके कांस्टेबलों के अलावा पुलिस अधिकारियों के एक और समूह को आरोपी बनाने की मांग की गई थी. स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की चिट्ठी के बाद उनकी सेवाओं को महाराष्ट्र सरकार ने समाप्त कर दिया था और तब से मुकदमा चलाने के लिए एक नए स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति की प्रतीक्षा में मुकदमा ठप है. वाजे अभी भी इस मामले में एक आरोपी हैं और चूंकि वह इस मामले में मुख्य अभियुक्तों में से एक हैं, इसलिए वह इस मामले में गवाह नहीं बन सकते और क्षमा नहीं मांग सकते.
एंटीलिया केस और हिरेन मर्डर केस में खारिज हो चुकी है जमानत याचिका
16 साल के निलंबन के बाद जून 2020 में कोरोनाकाल के दौरान वाजे को मुंबई पुलिस में बहाल कर दिया गया था. बाद में उन्हें 2021 एंटीलिया केस और व्यवसायी मनसुख हिरेन की मौत के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार किया था. गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत वाजे और कुछ अन्य के खिलाफ आरोप अलग हैं. इस केस में भी वाजे मुख्य आरोपी है और इसलिए वे सरकारी गवाह नहीं बन सकते या उसे क्षमा नहीं दी जा सकती. जमानत अर्जी भी एनआईए की विशेष अदालत ने खारिज कर दी थी.

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