
'संवाद ही स्थायी समाधान...'चीन ने US-ईरान से की बातचीत शुरू करने की मांग
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चीन ने अमेरिका और ईरान से तुरंत बातचीत फिर शुरू करने का आह्वान किया है और कहा है कि सैन्य संघर्ष नहीं, बल्कि कूटनीतिक वार्ता ही मिडिल ईस्ट संकट का स्थायी हल है. बीजिंग ने साफ किया कि किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय मामलों पर प्रभुत्व जमाने का अधिकार नहीं है और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को मजबूत करना जरूरी है.
चीन ने मिडिल ईस्ट संकट पर चिंता जाहिर की है और बुधवार को अमेरिका और ईरान से तुरंत संवाद फिर से शुरू करने की बात कही है. चीन की संसद नेशनल प्यूपल्स कॉन्ग्रेस (NPC) के प्रवक्ता ने ईरान में बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि सैन्य अभियान तुरंत रोके जाएं.
प्रवक्ता ने कहा कि राजनीतिक और कूटनीतिक वार्ता को फिर से शुरू करना बेहद जरूरी है ताकि क्षेत्र में स्थिरता कायम की जा सके. उन्होंने यह भी जोर दिया कि किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय मामलों पर एकतरफा प्रभुत्व जमाने का अधिकार नहीं है. चीन ने वैश्विक संगठनों की भूमिका को भी अहम बताया और कहा कि संयुक्त राष्ट्र (United Nations) को मजबूत बनाना जरूरी है ताकि अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान संभव हो सके.
इस बयान के जरिए बीजिंग ने स्पष्ट किया कि बढ़ते सैन्य संघर्ष और टकराव के बजाय राजनीतिक समाधान और बातचीत ही संकट का स्थायी हल हैं. वहीं चीन ने अमेरिका के साथ अपने रिश्तों पर भी बात रखी. चीन की सर्वोच्च विधायिका नेशनल प्यूपल कांग्रेस (NPC) के चौथे सत्र के प्रवक्ता Lou Qinjian ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चीन अमेरिका के साथ सभी स्तरों और विभिन्न माध्यमों से संवाद मजबूत करने को तैयार है, ताकि सहयोग के लिए और व्यापक अवसर तैयार किए जा सकें.
संवाद के लिए तैयार, लेकिन सिद्धांतों पर अडिग
लाउ चिनजियान ने साफ कहा कि चीन के अपने सिद्धांत और “रेड लाइन” हैं. देश अपनी संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इन मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने दोहराया कि चीन लगातार यह कहता रहा है कि चीन और अमेरिका जैसे दो बड़े देशों को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए, शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व अपनाना चाहिए और “विन-विन सहयोग” की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.
शीर्ष नेतृत्व की कूटनीति की अहम भूमिका

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