
शीना बोरा हत्याकांड: जेल से बाहर नहीं आ सका श्यामवर, बॉम्बे HC से जमानत की शर्तों में छूट मांगी
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शीना बोरा हत्याकांड में इंद्राणी मुखर्जी मुख्य आरोपी हैं. उन पर अपनी बेटी की गला घोंटकर हत्या का आरोप है. घटना के समय श्यामवर राय, इंद्राणी के ड्राइवर के रूप में काम करता था. 2015 में श्यामवर राय को खार पुलिस थाने ने नाकाबंदी में पकड़ा था, तब वह अपने पास मौजूद बंदूक को ठिकाने लगाने की फिराक में था.
शीना बोरा हत्याकांड में आरोपी से सरकारी गवाह बने श्यामवर राय ने एक बार फिर बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. श्यामवर राय ने HC से जमानत की शर्तों में छूट की मांग की है. जमानत मिलने के तीन महीने बाद भी राय जेल में बंद है. श्यामवर ने कोर्ट से कहा है कि वह 'भारी' जमानत की शर्तों का पालन करने में सक्षम नहीं है.
श्यामवर राय मुख्य आरोपी और व्यवसायी इंद्राणी मुखर्जी के ड्राइवर के रूप में काम करता था. श्यामवर ने 20 अगस्त 2022 को पारित जमानत आदेश में संशोधन की मांग की है. हत्या के मामले में जमानत मिलने के बावजूद वह जेल से बाहर नहीं आ पाया है, जबकि अन्य सभी आरोपी जमानत पर जेल से बाहर हैं.
जमानत आदेश में उसे एक लाख रुपये की राशि का पीआर बॉन्ड और इतनी ही राशि की एक या दो जमानत देने को कहा गया था. हालांकि, राय की तरफ से अधिवक्ता सत्यव्रत जोशी और नितेश मोहिते के जरिए याचिका दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि वह इस तरह की 'भारी' जमानत शर्त का पालन करने में सक्षम नहीं है. ऐसे में अनंतिम नकद जमानत (provisional cash bail) की अनुमति दी जाए.
राय की याचिका में कहा गया है कि हाई कोर्ट पहले ही इस निष्कर्ष पर पहुंच चुका है कि उसे जमानत दी जानी चाहिए, लेकिन लगाई गई शर्त के कारण वह अभी भी ठाणे की केंद्रीय जेल में बंद है.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 2015 में श्यामवर राय को खार पुलिस थाने ने नाकाबंदी में पकड़ा था, तब वह अपने पास मौजूद बंदूक को ठिकाने लगाने की फिराक में था. हिरासत में लिए जाने के बाद उसने कथित तौर पर इंद्राणी मुखर्जी और उसके पूर्व पति संजीव खन्ना के नाम का खुलासा किया, जो 2012 में उनकी बेटी शीना की हत्या में शामिल थे.
राय इस केस में सरकारी गवाह बन गया था और आरोप लगाया था कि वह कार में था, जब मुखर्जी और खन्ना ने शीना का गला घोंट कर मार डाला और उसके अवशेषों को पेन के जंगलों में फेंक दिया. राय का कहना है कि हत्या के केस में सुनवाई पूरी होने में लंबा वक्त लगेगा. इस तरह मामले में अन्य अभियुक्तों के साथ समानता के आधार पर उसे भी जेल से बाहर आने में सक्षम होना चाहिए.

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