
शादी, धर्म, पर्सनल लाइफ पर बेबाक बोलती हैं नुसरत जहां, BJP के सामने होगी TMC स्टार की परीक्षा
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बंगाल में हिंसा, धुव्रीकरण और वोटों की गोलबंदी के बीच में नुसरत से ममता बनर्जी को बड़ी उम्मीद है. वो न सर्फ पार्टी की सांसद हैं बल्कि क्राउड पुलर नेता भी हैं. टॉलीवुड की अभिनेत्री होने की वजह होने से लोगों के बीच उनका सहज आकर्षण है.
पश्चिम बंगाल के चुनावी रण की बिसात बिछ चुकी है. इस चुनाव में सीएम ममता बनर्जी की परीक्षा तो है ही, ममता के सिपहसालारों की परीक्षा है. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का मुकाबला करने के लिए ममता ने कई स्टार चेहरों को टिकट दिए. नुसरत जहां और मिमी चक्रवर्ती इस लिस्ट में टॉप थीं. ग्लैमर और स्टार पावर से लैस ये दोनों चेहरे न सिर्फ लोकसभा चुनाव के दौरान सुर्खियां बने, बल्कि चुनाव में जीत के बाद संसद के अंदर और बाहर भी हेडलाइंस में बने रहे. ऐसा कभी इनकी निजी जिंदगी की वजह से हुआ तो कभी राजनीति और धर्म को लेकर दिए गए बयानों के लिए. इस साल बंगाल विधानसभा चुनाव में इन चेहरों की स्टार पावर की अपने क्षेत्र में लोकप्रियता की परीक्षा है. अगर बात नुसरत जहां की करें तो वह उत्तरी 24 परगना से सांसद हैं. नुसरत जहां के क्षेत्र में विधानसभा की 7 सीटें आती हैं. ममता बनर्जी को इस चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी से मिल रही है. नुसरत जहां के सामने चुनौती ये है कि वो इन 7 सीटों को ममता की झोली में देकर बंगाल की सत्ता पर उनकी दावेदारी को मजबूत करें.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









