
शहबाज के मंत्री ने बताया- कब पाकिस्तान लौटेंगे नवाज शरीफ? कहा- बिलावल होंगे विदेश मंत्री
AajTak
पाकिस्तान की सत्ता से इमरान खान के बेदखल होने और पीएमएल-एन के शहबाज शरीफ की ताजपोशी के बाद से ही नवाज शरीफ की स्वदेश वापसी को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं. अब शहबाज सरकार में मंत्री मियां जावेद लतीफ ने बताया है कि नवाज कब पाकिस्तान आएंगे.
पाकिस्तान की सत्ता से इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार की विदाई के बाद अब सियासी हालात बदल रहे हैं. पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लीम लीग नवाज ने सरकार बनाई और उनके भाई शहबाज शरीफ प्रधानमंत्री बन गए. पाकिस्तान की सत्ता पर शहबाज शरीफ की ताजपोशी के साथ ही तीन बार के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का लंदन से लौटना तय माना जा रहा था लेकिन इसे लेकर केवल अटकलें ही लगाई जा रही थीं.
अब पीएमएलएन के नेता मियां जावेद लतीफ ने कहा है कि नवाज शरीफ ईद के बाद पाकिस्तान लौटेंगे. मियां जावेद लतीफ, शहबाज शरीफ के मंत्रिमंडल में मंत्री भी बनाए गए हैं. लतीफ की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि पीएमएलएन कोर्ट पर भरोसा करती है और इसके निर्णय को स्वीकार करेगी. 72 साल के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ संविधान और कानून के मुताबिक अपने खिलाफ दायर केस का सामना करेंगे.
नवगठित शहबाज सरकार के मंत्रिमंडल को लेकर जावेद लतीफ ने कहा है कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने मंत्री बनाए जाने के लिए बिलावल भुट्टो जरदारी का नाम आगे बढ़ाया है. बिलावल भुट्टो जरदारी अगले विदेश मंत्री होंगे. उन्होंने कहा कि बिलावल लंदन से लौटने के बाद मंत्री पद की शपथ लेंगे. पीपीपी के महासचिव फरहतुल्लाह बाबर ने भी बिलावल के लंदन जाने की पुष्टि की है. उन्होंने कहा है कि नवाज शरीफ से मिलकर गठबंधन सरकार और वर्तमान राजनीतिक हालात पर चर्चा करने के लिए बिलावल भुट्टो लंदन गए हैं.
बता दें कि इसी साल फरवरी में नवाज शरीफ का पासपोर्ट एक्सपायर हो गया था. इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार ने नवाज शरीफ का पासपोर्ट रिन्यू करने से इनकार कर दिया था. अब शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद गृह मंत्रालय ने नवाज शरीफ और उनके रिश्तेदार इशाक डार का पासपोर्ट रिन्यू करने के निर्देश दिए हैं.

ईरान युद्ध के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या इजरायल अमेरिका से अलग होकर काम कर रहा है. हालांकि यह साफ संकेत मिल रहा है कि दोनों देश अभी भी रणनीतिक रूप से साथ हैं और ‘गुड कॉप-बैड कॉप’ की भूमिका निभा सकते हैं. हाल के घटनाक्रमों ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या इजरायल अमेरिका से अलग चल रहा है या रणनीति का हिस्सा है?

इजरायल ने एक बार फिर ईरान पर हवाई हमला किया है. इजरायल द्वारा ईरान पर लगातार हमले जारी है. इजरायली हमलों से लगातार ईरान में तबाही मची हुई है. ईरान की राजधानी तेहरान इन हमलों से सबसे ज्यादा ग्रसित है, जहां लोग इन हमलों के बीच डर में रहने को मजबूर है. तेहरान के की इलाकों को इस हमले में निशाना बनाया गया.

ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सख्त प्रतिक्रिया दी है. व्हाइट हाुस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने युद्धविराम पर बात करते हुए कहा कि अमेरिका बातचीत कर सकता है, लेकिन युद्धविराम पर कोई विचार नहीं है. साथ ही येभी कहा कि जब सामने वालो पक्ष को अमेरिका पूरी तरह से नष्ट कर रहा है तो युद्धविराम नहीं होगा.

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने तुर्की और ओमान में हुए हमलों में अपना हाथ होने से साफ इनकार कर दिया है और इसे इजरायल की साजिश बताया है. ईद और नए साल के मौके पर दिए संदेश में उन्होंने दावा किया कि ईरान ने पिछले एक साल में तीन बड़ी जंग जीती हैं. उन्होंने मीडिया को आगाह किया कि वे देश की अंदरूनी कमियों को बढ़ा-चढ़ाकर न दिखाएं, क्योंकि इससे दुश्मनों की 'दिमागी जंग' को मदद मिलती है.

खाड़ी देशों में तनाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. जिसका सीधा असर तेल और गैस पर पड़ रहा है, जिसकी चपेट में पूरी दुनिया आ रही है. इस बीच अमेरिका और इजरायल के हमले का जवाब देने के लिए ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अपना एक खास हथियार बना लिया है. इस समुद्री गलियारे पर नियंत्रण के जरिए ईरान ने दुनिया के व्यापार को प्रभावित किया है और अब ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स वसूलना शुरू कर दिया है. देखें वीडियो.

इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने के लिए ईसा मसीह और चंगेज खान का उदाहरण देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने कहा कि अगर समाज अपनी रक्षा नहीं कर पाता, तो यीशु मसीह भी चंगेज खान को नहीं हरा सकते. इस बयान पर ईसाई जगत और ईरान ने तीखी आपत्ति जताई और इसे ईसा मसीह का अपमान बताया. विवाद बढ़ता देख नेतन्याहू ने सफाई दी कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था.

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका ने ईरानी हैकिंग ग्रुप 'हंडाला' के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसके चार डोमेन को सीज कर दिया है. बीते दिनों हंडाला ने अमेरिकी मेडिकल कंपनी स्ट्राइकर पर मैलवेयर हमला किया था और इजरायली अधिकारियों के डेटा को लीक किया था. FBI ने इस कार्रवाई को ईरानी साइबर ऑपरेटरों के लिए चेतावनी बताया है.

इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती जंग ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगभग ठप्प कर दिया है. जहां पहले रोज़ाना 130 से ज्यादा जहाज गुजरते थे, अब वहां गिनती सिर्फ 5 जहाजों तक सिमट गई है. इस रास्ते के बंद होने से भारत समेत पूरी दुनिया में तेल और गैस की किल्लत हो सकती है, क्योंकि सऊदी और यूएई की वैकल्पिक पाइपलाइनों में इतना दम नहीं कि वे होर्मुज की कमी पूरी कर सकें.

अली लारिजानी पर जर्मन दार्शनिक कांट का गहरा बौद्धिक प्रभाव था. लेकिन राजनीतिक चातुर्य ने उन्हें व्यावहारिक बना दिया. उन्होंने कांट को समझा, लिखा और उनकी व्याख्या की. पर ईरान में उसे लागू करने के दौरान भू-राजनीति की वास्तविकताओं ने उनके फैसलों पर असर डाला. दरअसल वे कांट से प्रभावित एक व्यवहारिक रणनीतिकार अधिक थे.




