
'वो फासीवाद के खिलाफ शक्तिशाली आवाज', अरुंधति के खिलाफ केस चलाने की मिली इजाजत तो भड़कीं महबूबा और महुआ
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दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इस मामले में अरुंधति रॉय और कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कानून के पूर्व प्रोफेसर डॉ. शेख शौकत हुसैन के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 45 (1) के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है. एलजी के इस कदम से विपक्ष भड़का हुआ है.
दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने लेखिका अरुंधति रॉय और कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय कानून के पूर्व प्रोफेसर डॉ. शेख शौकत हुसैन के खिलाफ साल 2010 में यहां एक कार्यक्रम में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के मामले में कठोर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है. अधिकारियों ने बताया कि रॉय और कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर शेख शौकत हुसैन के खिलाफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, नयी दिल्ली की अदालत के आदेश के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
इस एफआईआर को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं. जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती, कांग्रेस नेता हरिप्रसाद बीके और तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने इस एफआईआर की आलोचना की है.
विपक्ष ने एक सुर में की एफआईआर की आलोचना
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'अरुंधति रॉय विश्व प्रसिद्ध लेखिका और एक बहादुर महिला हैं जो फासीवाद के खिलाफ एक शक्तिशाली आवाज के रूप में उभरी हैं, उन पर कठोर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है. भारत सरकार मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हुए अपनी क्रूरता जारी रखे हुए है. कश्मीर के एक पूर्व लॉ प्रोफेसर पर मामला दर्ज करना भी हताशा का काम है.'
यह भी पढ़ें: अरुंधति रॉय के खिलाफ राजद्रोह का केस चलाने की मांग, वकील ने दर्ज कराई शिकायत
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पोस्ट करते हुए कहा, 'अगर अरुंधति रॉय पर यूएपीए के तहत मुकदमा चलाकर बीजेपी यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि वे वापस आ गए हैं, तो ऐसा नहीं है. और वे कभी भी उसी तरह वापस नहीं आएंगे जैसे वे पहले थे. इस तरह के फासीवाद के खिलाफ भारतीयों ने वोट दिया है.'

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