
वो गुट, जिसका काम ही UNSC में भारत की पक्की सदस्यता को रोकना है, पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की भी शामिल, क्या है वजह?
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यूनाइटेड नेशन्स समिट के दौरान अमेरिका ने यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) में भारत की स्थाई सदस्यता की पैरवी की. दुनिया की सबसे शक्तिशाली बॉडी कहलाती इस संस्था की मेंबरशिप के लिए भारत भी लंबे समय से जोर लगा रहा है, लेकिन चीन अक्सर अड़ंगा लगाता रहा. इसके अलावा लगभग 50 देशों का एक गुट है, जिसका एजेंडा ही यूएनएससी में भारत को कुर्सी मिलने से रोकना है.
अमेरिका में हुए संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन के बाद यूनाइटेड नेशन्स सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थाई सदस्यता को लेकर बात और जोर पकड़ चुकी. वाइट हाउस समेत लगभग सभी स्थाई सदस्य चाहते हैं कि गुट में भारत भी पक्की तौर पर शामिल हो जाए. तब दिक्कत कहां है? परमानेंट सदस्यों में से एक चीन लगातार इसपर वीटो लगाता रहा. लेकिन अगर वो मान भी जाए, तब भी रास्ता में कई रोड़े हैं, जैसे यूनाइटेड फॉर कंसेंशस. यह 50 से ज्यादा देशों का वो संगठन है, जिसका काम ही विरोध है.
यूएनएससी क्या है, और क्यों भारत का इसमें शामिल होना बड़ी बात होगी यूएन के कई सब-ग्रुप हैं. इसी में से एक है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, जो यूएन की सबसे पावरफुल शाखा है. इस काउंसिल में 15 सदस्यों की जगह है. UNSC की मेंबरशिप दो तरह की होती है- स्थाई और अस्थाई. पांच ही देश इसके परमानेंट सदस्य हैं- अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस और चीन. इसके अलावा 10 ऐसे देश सदस्य होते हैं, जो हर दो साल में बदल जाते हैं.
देश को क्या फायदा होगा
भारत लंबे समय से यूएनएससी के लिए जोर लगाता रहा. यूएनएससी पर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पक्की करने और यूएन चार्टर में किसी भी बदलाव को मंजूरी देने की जिम्मेदारी है. ये बहुत बड़ी बात है क्योंकि सीधा असर दुनिया के हर देश पर होता है. भारत को अगर ये जगह मिले तो ग्लोबल स्तर पर उसे कई कूटनीतिक फायदे हो सकते हैं. लोग देश की बढ़ती ताकत को तो अब भी जानते हैं लेकिन फिर उसपर आधिकारिक ठप्पा लग जाएगा. साथ ही वीटो पावर आने से वो इंटरनेशनल फैसलों में सीधा दखल दे सकता है. अंदरुनी आतंकवाद, जिसमें पाकिस्तान या दूसरे पड़ोसी देशों का हाथ है, उसे डील करने के लिए देश के पास ज्यादा ताकत आ जाएगी.
तब पेच कहां फंस रहा है कई बार अस्थाई सदस्य रह चुके भारत की स्थाई कुर्सी के लिए चारों ही स्थाई सदस्य राजी हैं, सिवाय चीन के. पांचवा मेंबर चीन डरा हुआ है कि भारत भी इस गुट में आए तो उसकी ताकत में सीधी कमी आएगी. साथ ही बाकी देशों से भारत की घनिष्ठता के चलते वो अलग-थलग पड़ सकता है. लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती. एक गुट ऐसा है जिसका काम ही भारत या जापान जैसे देशों को यूएनएससी में जगह मिलने से रोकना है.

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