
वॉन्टेड लिस्ट में नाम मिसिंग, विजय या उस्मान पर सस्पेंस.. एनकाउंटर पर यूपी पुलिस की थ्योरी में पेच
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यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने बताया कि जो उस्मान एनकाउंटर में मारा गया, उसका उमेश पाल मर्डर केस में क्या रोल था? और वो कैसे पहचाना गया? बकौल एडीजी ये उस्मान वो शूटर था, जिसने ना सिर्फ उमेश पाल बल्कि उसके गनर पर भी गोली चलाई थी.
कोर्ट, कचहरी, दलील, वकील, बहस, सबूत, गवाह और इंसाफ... लगता है ये सब दूसरे दौर की बात हो चुकी है. नए दौर में अब पुलिसवालों को अदालत में जाना भी गवारा नहीं. और इसीलिए उन्होंने अब इंसाफ का नाम बदलकर मिट्टी में मिला देना रख दिया है. उमेश पाल मर्डर केस के बाद जिस तरह से मिट्टी में मिलाने का चलन शुरु हुआ है, उसकी दूसरी कहानी एक नए अंदाज में सामने आई है.
एडीजी ने दिया न्यूज चैनलों का हवाला कहानी की शुरूआत करते हैं यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार से. जिन्होंने बताया कि जो उस्मान एनकाउंटर में मारा गया, उसका उमेश पाल मर्डर केस में क्या रोल था? और वो कैसे पहचाना गया? बकौल एडीजी ये उस्मान वो शूटर था, जिसने ना सिर्फ उमेश पाल बल्कि उसके गनर पर भी गोली चलाई थी. इतना ही नहीं इन्होंने बाकायदा न्यूज चैनलों का भी हवाला दिया कि उस्मान गोली चलाता हुआ साफ नजर आ रहा है.
यूपी पुलिस ने खुद चैनलों को दी थीं तस्वीरें जाहिर है खुद एडीजी लॉ एंड ऑर्डर साहब और यूपी पुलिस के इनके बाकी साथियों ने भी चैनलों पर उस्मान को बार-बार देखा होगा. हालांकि चैनलों पर शूटआउट की जो तस्वीरें चल रही थी, कायदे से वो खुद यूपी पुलिस ने ही चैनलों को दी थी. इसका मतलब ये हुआ कि चैनल से पहले खुद यूपी पुलिस ने भी उस्मान को गोली चलाते हुए कई बार देखा होगा. चलिए... अब आपको उसी यूपी पुलिस की एक दूसरी के बारे में बताते हैं.
यूपी पुलिस ने जारी किए थे केवल पांच नाम इतेफाक से यूपी पुलिस के ऑफिशियल ट्वीटर हैंडल पर एक ट्वीट पांच मार्च यानी रविवार को दोपहर 3.17 मिनट पर किया गया था. उस ट्वीट के जरिए यूपी पुलिस ने उमेश पाल शूट आउट में शामिल शूटरों की गिरफ्तारी पर इनाम की रकम बढाने का ऐलान किया था. पहले इनाम 50 हजार था, जिसे यूपी डीजीपी के कहने पर ढाई लाख कर दिया गया. अब जरा इस ट्वीट में दर्ज आरोपियों के नामों को बेहद गौर से पढिएगा. कुल पांच नाम हैं, पहला नाम अरमान, दूसरा असद, तीसरा गुलाम, चौथा गुड्डू मुस्लिम और पांचवा साबिर. साथ में सबके पिता का भी नाम भी लिखा है. अब अगर अब भी समझ ना आया हो, तो फिर से इन नामों को देख लीजिए. आपको इस लिस्ट में उस्मान चौधरी या यूं कहें कि विजय चौधरी का नाम कहीं दिखाई नहीं देगा.
वॉन्टेड लिस्ट में नहीं था उस्मान उर्फ विजय का नाम अब सोचिए... जिस उस्मान के एनकाउंटर की खबर सोमवार 6 मार्च की दोपहर एडीजी लॉ एंड ऑर्डर दे रहे हैं, उससे 12 घंटे पहले तक खुद उस उस्मान चौधरी या विजय चौधरी का नाम यूपी पुलिस की वॉन्टेड लिस्ट में कहीं है ही नहीं. अब सवाल ये है कि जो उस्मान चौधरी उर्फ विजय चौधरी पिछले कई दिनों से गोलियां चलाते हुए लगातार चैनलों पर दिखाई दे रहा है, एनकाउंटर से 12 घंटे पहले तक वही उस्मान चौधरी या विजय चौधरी यूपी पुलिस को क्यों नहीं दिखाई दिया? और अगर दिखाई दिया था तो फिर यूपी पुलिस की वॉन्टेड लिस्ट से उसका नाम बाहर कैसे था?
एडीजी की कहानी में झोल! कहानी यहीं खत्म नहीं होती. एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के पास एक बार फिर लौटते हैं. एनकाउंटर में मारे गए उस शख्स का नाम सुनने के लिए. मीडिया को दिए गए उनके बयान को सुनकर पता चलता है कि एडीजी साहब सिर्फ एक शब्द में नाम ले रहे हैं. वरना अमूमन नाम के साथ पिता का भी नाम लेते रहे हैं. आगे बढें, उससे पहले जरा उस्मान चौधरी या विजय चौधरी की पत्नी की बात कर लें. जो कह रही हैं कि उसका नाम विजय चौधरी है, हमारा पूरा परिवार हिंदू है और वो विजय चौधरी के पिता का नाम भी बताती है.

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