
वेस्ट बैंक के पास भारतीय मूल के इजरायली सैनिक की गाड़ी से टक्कर मारकर हत्या
AajTak
समुदाय के सदस्यों ने पीटीआई को बताया कि वे बुधवार को आसफ जंक्शन के पास एक युवा की जान जाने की खबर से सदमे में हैं. हमले की फुटेज भी सामने आई है, जिसमें एक फिलिस्तीनी लाइसेंस प्लेट वाला ट्रक व्यस्त राजमार्ग से हटकर एक बस स्टॉप के पास इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) गार्ड पोस्ट से टकराता हुआ दिखाई दिया, फिर रुक गया.
वेस्ट बैंक के बेत एल बस्ती के पास एक वाहन से टक्कर मारकर बेनी मेनाशे समुदाय के 24 वर्षीय भारतीय मूल के इजरायली सैनिक की हत्या कर दी गई. गुरुवार को इजरायली सेना ने बताया कि स्टाफ सार्जेंट गेरी गिदोन हंगल नोफ हागलिल के निवासी थे और केफिर ब्रिगेड की नहशोन बटालियन के सैनिक थे.
समुदाय के सदस्यों ने पीटीआई को बताया कि वे बुधवार को आसफ जंक्शन के पास एक युवा की जान जाने की खबर से सदमे में हैं. हमले की फुटेज भी सामने आई है, जिसमें एक फिलिस्तीनी लाइसेंस प्लेट वाला ट्रक व्यस्त राजमार्ग से हटकर एक बस स्टॉप के पास इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) गार्ड पोस्ट से टकराता हुआ दिखाई दिया, फिर रुक गया.
इजरायली सुरक्षा सूत्रों ने संदिग्ध का नाम 58 वर्षीय हायल धैफल्लाह बताया है, जो सेंट्रल वेस्ट बैंक शहर रफत का रहने वाला था. उन्होंने बताया कि सार्जेंट हंगल का अंतिम संस्कार गुरुवार को किया जाएगा. हंगहल 2020 में भारत के उत्तरपूर्वी हिस्से से इज़रायल में आकर बस गए. बनेई मेनाशे के लगभग 300 युवा मौजूदा युद्ध के दौरान सेना की ड्यूटी कर रहे हैं, उनमें से ज़्यादातर लड़ाकू इकाइयों में सेवारत हैं.
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों मणिपुर और मिज़ोरम से आने वाले बनेई मेनाशे के बारे में माना जाता है कि वे प्राचीन काल की विलुप्त जनजातियों में से एक, मेनसेह की इजरायली जनजाति के वंशज हैं. सेफ़र्डिक चीफ़ रब्बी श्लोमो अमर ने 2005 में उन्हें मेनसेह का वंशज घोषित किया, जिससे “खोई हुई जनजाति” के सदस्यों के रूप में उनके इजरायल में प्रवास का मार्ग प्रशस्त हुआ.
बनेई मेनाशे समुदाय के लगभग 5,000 सदस्यों के बारे में कहा जाता है कि वे इजरायल में प्रवास कर चुके हैं, जिनमें से लगभग 1,500 पिछले पाँच वर्षों में इजरायल में प्रवास कर चुके हैं. अन्य 5,500 अभी भी भारत में रहते हैं और प्रवास करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
यह हमला पश्चिमी तट से होने वाले आत्मघाती बम विस्फोटों और गोलीबारी की घटनाओं की श्रृंखला के बाद हुआ है, जिसकी जिम्मेदारी इस्लामिक हमास ने ली है. हमास ने पिछले साल 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमला किया था, जिसके कारण गाजा में युद्ध जारी है.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









