
'विरासत सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि मानवता की साझा चेतना है', विश्व धरोहर समिति के उद्घाटन में बोले PM मोदी
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पीएम मोदी ने कहा कि भारत की विरासत सिर्फ इतिहास नहीं है, यह विज्ञान भी है. भारत की विरासत में शीर्ष पायदान की इंजीनियरिंग की गौरवशाली यात्रा भी देखी जाती है.इस बैठक में 150 से अधिक देशों के 2,000 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नई दिल्ली में भारत मंडपम में विश्व धरोहर समिति (WHC) के 46वें सत्र का उद्घाटन किया.इस दौरान उन्होंने लोगों को विश्व की भलाई और दिलों को जोड़ने के लिए विरासत की क्षमता का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि विरासत सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि मानवता की ‘साझा चेतना’ है. पीएम मोदी ने विरासत की सार्वभौमिकता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जब भी कोई ऐतिहासिक स्थलों को देखता है, तो ‘हमारा मन वर्तमान भू-राजनीतिक कारकों से ऊपर उठ जाता है’.
350 कलाकृतियों को वापस लाया गया
भारत पहली बार 21 जुलाई से 31 जुलाई तक यूनेस्को के प्रमुख कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है.मंच पर मोदी के साथ यूनेस्को के महानिदेशक ऑड्रे अजोले, विदेश मंत्री एस जयशंकर और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत सहित अन्य लोग मौजूद थे.उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री ने भारत मंडपम में एक प्रदर्शनी का दौरा किया. इसमें देश में वापस लाई गई कुछ कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है. प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने शनिवार को एक बयान में कहा कि अब तक 350 से अधिक कलाकृतियां देश में वापस लाई जा चुकी हैं.
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प्राचीन कलाकृतियों के महत्व को बताया
उद्घाटन समारोह में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने प्रदर्शनी के बारे में बात की और कहा कि प्राचीन कलाकृतियों की वापसी वैश्विक उदारवाद और इतिहास के प्रति सम्मान की भावना को दर्शाती है.उन्होंने कहा कि 46वां डब्ल्यूएचसी सत्र 'दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक' में हो रहा है.मोदी ने उन इंजीनियरिंग उपलब्धियों की भी सराहना की जो प्राचीन विरासत स्थलों का प्रतिनिधित्व करती हैं. उन्होंने उत्तराखंड में केदारनाथ मंदिर और चोलों द्वारा निर्मित बृहदीश्वर मंदिर का हवाला दिया.

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