
विपक्ष को 'आईना', 2047 का ब्लूप्रिंट, वैश्विक नेतृत्व की बात... समझें राज्यसभा में PM मोदी के 97 मिनट के भाषण के मायने
AajTak
पीएम मोदी के इस भाषण में इतिहास की धूल से लेकर भविष्य की नींव तक की पूरी यात्रा समाई हुई थी. साथ ही ये भाषण उस विपक्ष के लिए भी एक कड़ा संदेश था जो प्रधानमंत्री मोदी की कब्र खोदने के नारे लगाता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए 97 मिनट का लंबा और आक्रामक भाषण दिया. विपक्ष के हंगामे के कारण वह एक दिन पहले लोकसभा में भाषण नहीं दे पाए थे, लेकिन राज्यसभा में उन्होंने सरकार की उपलब्धियों, वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका और विपक्ष की राजनीति पर खुलकर बात की. प्रधानमंत्री का ये भाषण केवल एक संसदीय वक्तव्य नहीं था बल्कि ये राजनीतिक आत्मविश्वास, वैचारिक आक्रमण और राष्ट्रवादी संकल्प का 360 डिग्री प्रदर्शन था.
इस भाषण में इतिहास की धूल से लेकर भविष्य की नींव तक की पूरी यात्रा समाई हुई थी. साथ ही ये भाषण उस विपक्ष के लिए भी एक कड़ा संदेश था जो प्रधानमंत्री मोदी की कब्र खोदने के नारे लगाता है. संक्षेप में कहें तो ये भाषण इतिहास की झांकी भी था और भविष्य का ब्लूप्रिंट भी, जहां शब्द केवल वाक्य नहीं थे बल्कि राजनीतिक मारक क्षमता से लैस संकल्प बाण थे.
प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर विपक्ष लोकतंत्र और संविधान के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझता तो लोकसभा में कल (बुधवार) वो घटना नहीं होती, जिसने भारत की संवैधानिक व्यवस्था का अपमान किया. ये वही घटना है, जिसमे कांग्रेस की 6 महिला सांसद हंगामा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी की कुर्सी तक पहुंच गई थीं और इसके बाद ऐसा पहली बार हुआ था, जब लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी भाषण नहीं दे पाए थे.
यह भी पढ़ें: 'कांग्रेस ने संविधान, राष्ट्रपति से लेकर सिखों तक का अपमान किया', पीएम मोदी का राहुल गांधी पर तीखा वार
ट्रेड डील का जिक्र कर कांग्रेस पर साधा निशाना
अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सरकार की 12 साल की उपलब्धियां गिनवाईं और अपने भाषण के जरिए ये बताने की कोशिश की कि इन उपलब्धियों की चकाचौंध की वजह से ही विपक्ष निराशा के अंधेरे में खो गया है. उन्होंने कहा कि उनके पास देश के 140 करोड़ लोगों का सुरक्षाकवच है और विपक्ष झूठे आरोप लगाकर उनकी छवि को खराब नहीं कर पाएगा, क्योंकि मोदी देश के 140 करोड़ लोगों को समाधान मानता जबकि कांग्रेस देश के लोगों को समस्या मानती है.

ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अहम चेहरा अली लारीजानी को इजरायल ने टारगेट किया है. हालांकि ये अब तक साफ नहीं है कि अली लारीजानी की स्थिति कैसी है. इजराइल का एक और बड़ा दावा है कि उसके हमले की जद में बसीज कमांडर भी आए हैं. दावे के मुताबिक बसीज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर गुलामरेज़ा सुलेमानी को भी निशाना बनाया गया. बसीज, ईरान की एक अहम पैरामिलिट्री फोर्स है, जो आंतरिक सुरक्षा और विरोध प्रदर्शनों को दबाने में भूमिका निभाती है.

एक तरफ अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे है. वहीं दूसरी तरफ हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल की जंग जारी है. इजरायल ने एक बार फिर लेबनान में हमला किया. लेबनान की राजधानी बेरूत में इजरायली एयर फोर्स ने एयर स्ट्राइक की. हिज्बुल्लाह के ठिकानों को इजरायल ने निशाना बनाया, हमले के बाद बेरूत के कई इलाकों में धमाके की आवाज सुनी गई. हमले के बाद काला धुआं भी उठता देखा गया.

होर्मुज में तेल और गैस पर ईरान ने जो रोक लगा रखी है, उसकी सुरक्षा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने मित्र देशों से युद्धपोत भेजने की गुहार लगाई है. लेकिन फ्रांस, जापान, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया ने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया, यगां तक की यूके ने भी कहां वो अभी इसपर विचार विमर्श कर रहे है.

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक से सारे शहर में सन्नाटा पसरा है. जिस अस्पताल में कभी हजार से ज्यादा मरीज थे वो इमारत अब खंडहर में तब्दीर हो गई है. चारों ओर सिर्फ आग और धुंए का गुबार दिख रहा है. इस हमले से 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और 250 से ज्यादा लोग घायल हो चुके है.









