
विधानसभा चुनाव 2022: BJP ने किस राज्य में किसे बनाया प्रभारी और सह-प्रभारी, देखें पूरी लिस्ट
AajTak
बीजेपी ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा , मणिपुर के लिए अपने प्रभारियों और सह प्रभारियों के नाम का ऐलान कर दिया. धर्मेंद्र प्रधान (यूपी), प्रल्हाद जोशी (उत्तराखंड), गजेंद्र सिंह शेखावत (पंजाब), भूपेंद्र यादव (मणिपुर), देवेंद्र फडनवीस (गोवा) को प्रभारी बनाया गया है.
साल 2022 में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने कमर कस ली है. इसी कड़ी में बुधवार को बीजेपी ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा , मणिपुर के लिए अपने प्रभारियों और सह प्रभारियों के नाम का ऐलान कर दिया. धर्मेंद्र प्रधान (यूपी), प्रल्हाद जोशी (उत्तराखंड), गजेंद्र सिंह शेखावत (पंजाब), भूपेंद्र यादव (मणिपुर), देवेंद्र फडणवीस (गोवा) को प्रभारी बनाया गया है. यूपी में बीजेपी ने क्षेत्र के हिसाब से भी प्रभारियों की नियुक्ति की है. बीजेपी ने यूपी में नियुक्त किए संगठन प्रभारी
नितिन नबीन बीजेपी के सबसे युवा अध्यक्ष हैं. पीएम मोदी ने आज नितिन नबीन को मिलेनियल बताया. नितिन नबीन के लिए 2026 की चुनावी चुनौती बड़ी है, क्योंकि बंगाल, केरल, और तमिलनाडु में बीजेपी कभी सत्ता में नहीं रही. 2027 में यूपी का भी चुनाव है. सवाल है कि क्या नितिन नबीन के युवा नेतृत्व का जोश, क्या विपक्ष को और मुसीबत में डालने वाला है? देखें हल्ला बोल.

अहमदाबाद के घाटलोडिया इलाके में नेशनल स्कूल के बाहर दसवीं के छात्र पर जानलेवा हमला हुआ है. परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद 8 से 10 हमलावरों ने छात्र को घेर लिया और उसे स्कूल से लगभग 50 मीटर दूर तक घसीट कर चाकू, पाइप और लकड़ी से बेरहमी से मारा. इस मामले में स्कूल के चार छात्र और उनके साथी शामिल हैं. पुलिस ने बताया कि यह हमला पुरानी रंजिश के कारण हुआ है.

जम्मू-कश्मीर के किश्तवार जिले में ऑपरेशन त्राशी-1 के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकियों की छिपने की जगह का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है. यह ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के तहत किया गया जिसमें आतंकियों को पकड़ने और उन्हें मार गिराने के उद्देश्य से सुरक्षा बल सक्रिय थे. इस अभियान में आतंकियों के छिपने के स्थान का पता चलने से इलाके में सुरक्षा अभी और सख्त हो गई है.

प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद के दावे पर नोटिस जारी किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर 2022 के आदेशों का हवाला दिया गया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि नोटिस सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है और उन्होंने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है.

कोर्ट ने पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली बनाने पर जोर दिया ताकि बिना नसबंदी वाले कुत्तों की रिपोर्टिंग हो सके. 28 जनवरी को सरकारों की ओर से सॉलिसिटर जनरल अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे. कोर्ट ने एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के पॉडकास्ट पर नाराजगी जताई और मामले की गंभीरता को रेखांकित किया. ये सुनवाई आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.








