
विदेश जाने वालों से इमीग्रेशन अधिकारी कोई फीस नहीं लेते, लोकसभा में गृह मंत्रालय ने दी जानकारी
AajTak
लोकसभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि इमीग्रेशन अधिकारी विदेश जाने वालों से कोई इमीग्रेशन फीस नहीं लेते. प्रवासियों के संरक्षक इमीग्रेशन फीस लेते हैं.
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के 10वें दिन यानी मंगलवार को लोकसभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि इमीग्रेशन अधिकारियों द्वारा विदेश जाने वालों से कोई इमीग्रेशन फीस नहीं ली गई है.
देश के बाहर जाने वाले लोगों से इमीग्रेशन अधिकारी कोई इमीग्रेशन फीस नहीं लेते हैं. हालांकि विदेश मंत्रालय के तहत, प्रवासियों के संरक्षक द्वारा उन लोगों से इमीग्रेशन फीस ली गई जो इंप्लॉयमेंट वीज़ा पर विदेश जा रहे थे.
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह भी बताया कि पिछले 3 सालों में विदेश मंत्रालय ने इमीग्रेशन फीस से कितनी राशी एकत्र की गई. उन्होंने कहा कि 2018-19 में मंत्रालय को इमीग्रेशन फीस के रूप में कुल 7,97,26,496 रुपए मिले, जबकि 2019-20 के दौरान मंत्रालय को इमीग्रेशन फीस के रूप में 8,33,07,047 रुपए मिले.
उन्होंने बताया कि 2020-21 में इमीग्रेशन फीस के रूप में मंत्रालय को 2,14,02,208 रुपए प्राप्त हुए, जबकि 2021 से फरवरी 2022 तक मंत्रालय को 5,23,31,546 रुपए प्राप्त हुए. प्रवासियों के संरक्षक द्वारा जो इमीग्रेशन फीस ली जाती है उसे केंद्र सरकार के रेवेन्यू रिसिप्ट में जमा किया जाता है.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









