
वाइब कोडिंग क्या है? सुंदर पिचाई और श्रीधर वेम्बु क्यों कर रहे हैं इसके बारे में बात
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AI की वजह से आज बहुत से काम आसान हो चुके हैं. इसमें फिर चाहे इमेज जनरेट करना हो या फिर किसी वीडियो में एडिटिंग करना हो. ऐसा ही बदलाव कोडिंग और अन्य इंडस्ट्री में नजर आया है, जहां यूजर्स को कई घंटों तक बैठकर बेसिक कोडिंग करने की जरूरत नहीं है और वह काम AI कर देता है.
दुनियाभर की टेक कंपनियों के मालिक और उनके सीईओ आजकल वाइब कोडिंग को लेकर अपनी राय रखते हुए नजर आते हैं. हाल ही के दिनों में वाइब कोडिंग को लेकर फाफी चर्चा भी हो रही है. वाइब कोडिंग, यह असल में AI के द्वारा जनरेट होने वाली कोडिंग है, जिसकी मदद से ऐप और वेबपोर्टल के लिए कोडिंग तैयार की जा सकती है.
वाइब कोडिंग को ही इंडस्ट्री में नो-कोड (No-Code) और लो-कोड (Low-Code) के नाम से भी पहचान मिली है. इसके लिए यूजर्स को Python या JavaScript जैसी मुश्किल लैंग्वेज सीखने की कोई जरूरत नहीं होगी.
वाइब कोडिंग क्या है?
वाइब कोडिंग असल में एकदम नया तरीका है, जिसमें यूजर्स को खुद हर एक लाइन लिखने की जरूरत नहीं होती है. यूजर्स प्रॉम्प्ट देते हैं और AI उस वाइब के मुताबिक कोड तैयार करते हैं.
AI टूल जैसे GitHub Copilot या चैटजीपीटी पर यूजर्स जैसे ही लिखते हैं कि एक लॉगइन पेज बनाओ. इसके बाद पूरा कोड जनरेट होता है. हालांकि इसको थोड़ा बहुत एडिट और टेक्स्ट आदि को शामिल करना होता है. इसके बाद ऐप तैयार हो जाता है.
वाइब कोडिंग शब्द किसने गढ़ा?

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