
लॉजिक की कमी, एक्शन का ओवरडोज... RRR में बाहुबली जैसा जादू नहीं, इन वजहों ने 'बर्बाद' की फिल्म
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फिल्म में एक्टर्स के काम पर कोई शक नहीं है, पर जिस तरह से फिल्म में जबरदस्ती का एक्शन डाला गया है, वो सारा खेल बिगाड़ती नजर आती है. हिंदी में डब की गई RRR में डायलॉग्स का वो असर नहीं, ना इसके गाने कुछ खास जमे. जानिए क्यों RRR में बाहुबली जैसा जादू नहीं है.
RRR, फिल्म का पूरा नाम राइज रोर रिवोल्ट. राइज ठीक है, रिवोल्ट भी ठीक है, पर लगता है डायरेक्टर एसएस राजामौली ने रोर को कुछ ज्यादा ही सीरियसली ले लिया. फिल्म में इतने ज्यादा एक्शन सीन्स हैं कि लगता है बस भई अब बस कर.
राजामौली की फिल्म बाहुबली तो देखी ही होगी. बाहुबली का वो सीन याद है, जब नारियल के पेड़ पर लोगों को बांधकर ऊंचे और दूर खड़े किले की छत पर सैनिकों को दुश्मन से लड़ने पहुंचाया जाता है. अच्छा चलिए दूसरा सीन याद दिलाते हैं जब नुकीले सींग वाले दौड़ते सांड के झुंड के बीच बाहुबली यानी प्रभास फंस जाते हैं और खुद को बचा भी लेते हैं. इन डेंजरस सीन्स के बारे में अगर हकीकत में सोचें तो आप भी जानते हैं, ऐसा शायद ही मुमकिन हो. फिल्म है, कल्पना की यहां कोई सीमा नहीं होती. पर बाहुबली में कहानी, अभिनय, स्टार ने इन एक्शन सीन्स को संभाल लिया था.
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बेतुके लगे एक्शन सीन्स
डायरेक्टर एसएस राजामौली की फिल्मों में ऐसा ही है. एक्शन की हद पार करते हुए राजामौली अपनी फिल्मों में हीरो नहीं बल्कि देसी सुपर हीरोज दिखाते हैं. बाहुबली इसका सबसे अच्छा उदाहरण है. और अब इस लिस्ट में RRR भी जुड़ गई है. अगर आप एक्शन लवर हैं तो फिल्म अच्छी लगेगी, पर थोड़ा लॉजिकली सोचें तो फिल्म देख हंसी आ जाएगी.
फिल्म में एक्टर्स के काम पर कोई शक नहीं है, पर जिस तरह से फिल्म में जबरदस्ती का एक्शन डाला गया है, वो सारा खेल बिगाड़ती नजर आती है. इसकी शुरुआत रामचरण के एंट्री सीन से ही शुरू हो जाती है. एक तरफ दर्जन भर अंग्रेज ऑफिसर्स समेत सरकारी महकमे में नियुक्त भारतीय अफसर, और दूसरी तरफ इन अफसरों से लोहा लेने खड़े हजारों लोगों की भीड़.













