
लेफ्ट, राइट, लेफ्ट..? सही शुरुआत के लिए संजू सैमसन क्यों जरूरी
AajTak
टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की लेफ्ट-हैंड क्रांति उसकी ताकत के साथ-साथ कमजोरी भी बनती दिख रही है. टॉप ऑर्डर में लगातार बाएं हाथ के बल्लेबाजों के कारण विरोधी टीमों ने नई गेंद से ऑफ-स्पिन की स्पष्ट रणनीति अपनाई, जिसका असर शुरुआती विकेटों के रूप में दिखा.
पिछले कुछ वर्षों तक भारतीय व्हाइट-बॉल क्रिकेट में एक ही शिकायत बार-बार दोहराई जाती थी- टॉप ऑर्डर में दाएं हाथ के बल्लेबाजों की भरमार. गेंदबाजों के लिए एंगल एक जैसे, फील्ड सेट एक जैसी, और रणनीति भी लगभग तय. तब टीम प्रबंधन के भीतर यह सोच बनी कि लय तोड़ने, लाइन बिगाड़ने और विरोधियों को असहज करने के लिए बाएं हाथ के बल्लेबाज जरूरी हैं.
आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. भारत ने सिर्फ लेफ्ट-हैंडर्स को जोड़ा नहीं, बल्कि पूरी बल्लेबाजी पहचान उनके इर्द-गिर्द खड़ी कर दी. लेकिन 2026 टी20 वर्ल्ड कप में यही ताकत एक छिपी कमजोरी बनती दिख रही है.
2022 वर्ल्ड कप में टॉप-6 में केवल एक बाएं हाथ का बल्लेबाज था. 2024 तक यह संख्या तीन हो गई. मौजूदा टूर्नामेंट में तो बदलाव चरम पर है- दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टॉप-6 में पांच लेफ्ट-हैंडर्स, पाकिस्तान के खिलाफ टॉप-8 में छह बाएं हाथ के बल्लेबाज.
यह संयोग नहीं था, यह सुनियोजित रणनीति...
अभिषेक शर्मा और ईशान किशन इस नए टेम्पलेट के चेहरे बने- पावरप्ले में आक्रामक, निडर और मैच छीन लेने की क्षमता वाले. लेकिन टॉप ऑर्डर को इस हद तक एकतरफा बनाकर भारत ने अनजाने में रणनीतिक एकरसता भी पैदा कर दी. विरोधी टीमों को अब कमजोरियां खोजने की जरूरत नहीं रही. उन्हें पता है- नई गेंद से ऑफ-स्पिन डालो, बाहर की लाइन पर गेंद रखो, और धैर्य रखो.
... जहां से कहानी बदली

2003 के क्रिकेट वर्ल्ड फाइनल में भारतीय टीम खिताब जीतने के लिए मैदान पर उतरी थी, लेकिन कुछ ही घंटों में ये सपना टूट गया था. रिकी पोंटिंग की तूफानी पारी, वीरेंद्र सहवाग की अकेली जंग और 'स्प्रिंग बैट' की रहस्यमयी अफवाहों ने इस मुकाबले को सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और यादगार कहानी बना दिया.












