
'लक्ष्य दिखाई दे तो रहा है तो मंजिल जरूर आसान होगी ...' ऐसी मोटिवेशनल स्पीच देने वाला बिहार का रंजीत भी निकला फर्जी
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बिहार के शेखपुरा में एक युवक ने खुद को UPSC में 440वीं रैंक हासिल करने वाला बताकर लोगों को चौंका दिया. गांव में उसका सम्मान हुआ, पुलिस और नेताओं ने भी बधाई दी, और वह मंच से मोटिवेशनल भाषण देने लगा. लेकिन जब रिजल्ट की जांच हुई तो पता चला कि यह दावा फर्जी है और असली रैंक कर्नाटक के एक उम्मीदवार को मिली है. खुलासा होते ही युवक मोबाइल बंद कर फरार हो गया.
'जब लक्ष्य तुम्हें दिखाई पड़ रहा है बेटा, तो मंजिल जरूर आसान हो जाएगी…' ऐसी प्रेरणादायक बातें बोलने वाला रंजीत खुद ही एक झूठी कहानी का किरदार निकला. बिहार के शेखपुरा जिले में रंजीत ने खुद को यूपीएससी परीक्षा में चयनित बताकर न सिर्फ लोगों की वाहवाही लूटी, बल्कि कई जगह सम्मान भी हासिल कर लिया. लेकिन कुछ ही दिनों बाद जब सच्चाई सामने आई तो पूरे इलाके में हैरानी फैल गई.
दरअसल, शेखपुरा के माहुली थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव का रहने वाला रंजीत कुमार खुद को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में 440वीं रैंक हासिल करने वाला उम्मीदवार बता रहा था. यह खबर जैसे ही गांव और आसपास के इलाकों में फैली, लोग उसे बधाई देने पहुंचने लगे. जगह-जगह कार्यक्रम हुए, माला पहनाकर सम्मानित किया गया और मंच से उसे युवाओं के लिए प्रेरणा बताया गया. लेकिन जब रिजल्ट की असली सूची सामने आई तो पता चला कि 440वीं रैंक किसी और अभ्यर्थी को मिली है. इसके बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया.
जब सफलता की कहानी फैल गई
UPSC देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में बैठते हैं और उनमें से कुछ ही सफल हो पाते हैं. ऐसे में जब किसी गांव या छोटे शहर से किसी के चयन की खबर आती है तो वह पूरे इलाके के लिए गर्व का विषय बन जाती है. शेखपुरा में भी कुछ ऐसा ही हुआ. जैसे ही खबर फैली कि फतेहपुर गांव के रंजीत कुमार ने यूपीएससी में 440वीं रैंक हासिल की है, गांव में खुशी का माहौल बन गया. लोगों ने इसे बड़ी उपलब्धि मानते हुए रंजीत को सम्मानित करना शुरू कर दिया. कई जगह कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां उसे माला पहनाकर और शॉल ओढ़ाकर सम्मान दिया गया.
देता था मोटिवेशनल स्पीच
इन कार्यक्रमों में रंजीत कुमार युवाओं को प्रेरित करने वाले भाषण भी देने लगा. वह कहता था कि जीवन का सफर लंबा होता है, परिश्रम का लक्ष्य बड़ा होता है. जब लक्ष्य तुम्हें दिखाई पड़ रहा है तो मंजिल जरूर आसान होगी. लेकिन अगर लक्ष्य दिखाई ही नहीं पड़ रहा तो जितना भी मेहनत कर लो, कुछ हासिल नहीं होगा. उसकी बातें सुनकर लोग प्रभावित हो रहे थे. कई छात्र उसे प्रेरणा के रूप में देखने लगे थे. रंजीत अक्सर मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास की बातें करता था. वह यह भी कहता था कि इंसान को इतना मेहनत करना चाहिए कि किस्मत भी एक दिन कह उठे कि सफलता उसी की थी.

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